जय जय इंद्र देवा, स्वर्गलोक के राजा।
त्रिभुवन के स्वामी, बजे तेरा बाजा॥
॥ जय जय इंद्र देवा ॥
ऐरावत पर बैठे, वज्र हाथ में धारी।
मेघों के नायक, महिमा तुम्हारी॥
॥ जय जय इंद्र देवा ॥
वर्षा के दाता, जल बरसाते।
धरती को हरियाली, तुम ही दिलाते॥
॥ जय जय इंद्र देवा ॥
देवों के देवेंद्र, सुरपति कहलाते।
इंद्रलोक में बैठे, सब सुख पाते॥
॥ जय जय इंद्र देवा ॥
शचीपति हो तुम, अमरावती के राजा।
दैत्यों का नाश करो, यही है काजा॥
॥ जय जय इंद्र देवा ॥
जो भक्त तुम्हारी, आरती गाए।
सुख-समृद्धि उसके, घर में आए॥
॥ जय जय इंद्र देवा ॥
वज्रपाणि इंद्र, शरण में आए।
भक्तों की रक्षा, सदा तुम करो॥
॥ जय इंद्र देव की जय ॥

