माँ काली की पूजा का मूल उद्देश्य है भय, अज्ञान और नकारात्मकता का नाश करके आत्मिक शक्ति और सुरक्षा प्राप्त करना।
तैयारी (संकल्प)
सुबह या रात्रि (विशेषकर अमावस्या या मंगलवार/शनिवार) को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
पूजा स्थान को साफ करके लाल या काले कपड़े से चौकी तैयार करें।
मन में माँ काली का ध्यान करते हुए संकल्प लें कि आप श्रद्धा से पूजा कर रहे हैं।
पूजा सामग्री
माँ काली की प्रतिमा या चित्र
लाल या काले रंग के वस्त्र
लाल पुष्प (गुड़हल/जासवंद), बेलपत्र
धूप, दीप (सरसों के तेल का दीया)
नारियल, लाल चंदन
काले तिल, उड़द की दाल
पान, सुपारी, लौंग, इलायची
मिठाई या खीर (नैवेद्य)
गंगाजल, कुमकुम, सिंदूर
कपूर, घी
स्थापना और आवाहन
- 1
माँ काली की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें।
- 2
दीपक जलाकर धूप-अगरबत्ती करें।
- 3
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालिकायै नमः” मंत्र का जाप करते हुए माँ का आवाहन करें।
स्नान और श्रृंगार
- 1
माँ की प्रतिमा पर जल अर्पित करें (प्रतीकात्मक स्नान)।
- 2
चंदन, कुमकुम और फूल अर्पित करें।
- 3
माला पहनाएं और श्रृंगार करें।
भोग अर्पण
- 1
गुड़, नारियल, फल या मिठाई का भोग लगाएं।
- 2
कुछ स्थानों पर खीर या हलवा भी अर्पित किया जाता है।
मंत्र जाप
- 1
मुख्य मंत्र का जाप करें:
- 2
“ॐ क्रीं कालिकायै नमः”
- 3
या
- 4
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालिकायै नमः”
- 5
कम से कम 108 बार जप करना शुभ माना जाता है।
आरती
- 1
माँ काली की आरती करें और घंटी बजाएं।
- 2
आरती के बाद परिवार के सभी सदस्य आशीर्वाद लें।
प्रार्थना
- 1
अंत में माँ से अपने जीवन की बाधाओं, भय और नकारात्मकता दूर करने की प्रार्थना करें।
विशेष ध्यान

