रक्तबीज के रक्त की बूँदें भूमि पर गिरते ही उसके समान बलवान असुर उत्पन्न होते हैं। युद्धभूमि में उनकी संख्या बढ़ती जाती है और देवता भयभीत हो जाते हैं।
काली और रक्तबीज
रक्तबीज के रक्त की बूँदें भूमि पर गिरते ही उसके समान बलवान असुर उत्पन्न होते हैं। युद्धभूमि में उनकी संख्या बढ़ती जाती है और देवता भयभीत हो जाते हैं।
चण्डिका के कहने पर काली रक्त को धरती पर गिरने से पहले पी लेती हैं और उससे उत्पन्न असुरों को भी निगल जाती हैं। चण्डिका रक्तबीज पर प्रहार करती हैं। नए असुरों का बनना रुक जाता है और रक्तबीज का वध होता है।

