कामदेव आरती

कामदेव आरती

जय कामदेव भगवान, जय कामदेव भगवान।

प्रेम और प्रीति के दाता, जग में जय-जयकार॥

॥ जय कामदेव भगवान... ॥

गन्ने का धनुष सजाया, पुष्प बाण हैं न्यारे।

ऋतुराज वसंत के स्वामी, जग में सबसे प्यारे॥

रति संग विराजत हो प्रभु, रूप अपार।

॥ जय कामदेव भगवान... ॥

शुक वाहन पर विराजें, मनमोहन रूप धारी।

पुष्प शर की माला पहने, छवि अति प्यारी॥

अनंग नाम धरे तुमने, मन मोहनहार।

॥ जय कामदेव भगवान... ॥

प्रेम बढ़ाओ प्रभु मेरा, जीवन सुख दो दाता।

पति-पत्नी का प्रेम बढ़ाओ, बनो सुखदाता॥

भक्तों की सुनो विनती, करो उद्धार।

॥ जय कामदेव भगवान... ॥

जो जन तुम्हरी शरण में आवे, मन से ध्याए।

प्रेम का वरदान पाए, जीवन सुखमय पाए॥

मनोकामना पूरी करो, हो जय-जयकार।

॥ जय कामदेव भगवान... ॥

कामदेव के चरणों में, पुष्प अर्पण कीजे।

चन्दन, धूप, दीप से, आरती गाइए॥

देव प्रसन्न हों तुम पर, भरें भण्डार।

॥ जय कामदेव भगवान... ॥

जय कामदेव भगवान, जय कामदेव भगवान।

प्रेम और प्रीति के दाता, जग में जय-जयकार॥

पाठ पूर्ण

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