महावीर जाहरवीर आरती

महावीर जाहरवीर आरती

जय जय जाहरवीर हरे, जय जय गूगा वीर हरे।

धरती पर आ करके, भक्तों के दुख दूर करे॥

॥ जय जय जाहरवीर हरे ॥

जो कोई भक्ति करे प्रेम से, हाँ जी करे प्रेम से।

भागे दुख परे विघ्न हरे, मंगल के दाता तन का कष्ट हरे॥

॥ जय जय जाहरवीर हरे ॥

जेवर राव के पुत्र कहाये, रानी बाछल माता।

बागड़ जन्म लिया वीर ने, जय-जयकार करे॥

॥ जय जय जाहरवीर हरे ॥

धर्म की बेल बढ़ाई निश दिन, तपस्या रोज करे।

दुष्ट जनों को दण्ड दिया, जग में रहे आप खरे॥

॥ जय जय जाहरवीर हरे ॥

सत्य अहिंसा का व्रत धारा, झूठ से आप डरे।

वचन भंग को बुरा समझकर, घर से आप निकरे॥

॥ जय जय जाहरवीर हरे ॥

माड़ी में तुम करी तपस्या, अचरज सभी करे।

चारों दिशा में भक्त आ रहे, आशा लिए उतरे॥

॥ जय जय जाहरवीर हरे ॥

भवन पधारो अटल क्षत्र कह, भक्तों की सेवा करे।

प्रेम से सेवा करे जो कोई, धन के भण्डार भरे॥

॥ जय जय जाहरवीर हरे ॥

तन मन धन अर्पण करके, भक्ति प्राप्त करे।

भादों कृष्ण नौमी के दिन, पूजन भक्ति करे॥

॥ जय जय जाहरवीर हरे ॥

पाठ पूर्ण

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