श्री राधा रानी की पूजा दिव्य प्रेम, भक्ति, वैवाहिक सुख, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए की जाती है। राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण के प्रति शुद्ध भक्ति और अनंत प्रेम की सर्वोच्च स्वरूपा के रूप में पूजा जाता है।
तैयारी
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
श्री राधा रानी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें
संभव हो तो राधा रानी के साथ भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र भी स्थापित करें
वेदी को विशेष रूप से लाल और पीले फूलों से सजाएँ
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
शांत और भक्तिमय वातावरण बनाए रखें
आवश्यक सामग्री (सामग्री)
श्री राधा रानी की मूर्ति या चित्र
भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र (वैकल्पिक लेकिन शुभ)
लाल, गुलाबी और पीले पुष्प
तुलसी पत्र
चंदन का लेप
कुमकुम और हल्दी
अक्षत (चावल)
अगरबत्ती
घी का दीपक
कपूर
मिठाई, फल और दूध
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
पीला या लाल वस्त्र
स्वच्छ जल से भरा कलश
मंत्र जाप हेतु माला
संकल्प
शांत मन से हाथ जोड़कर बैठें
शुद्ध भक्ति के साथ श्री राधा रानी की पूजा करने का संकल्प लें
दिव्य प्रेम, शांति, आध्यात्मिक उन्नति और कृष्ण भक्ति की प्रार्थना करें
ध्यान
आँखें बंद करके श्री राधा रानी का ध्यान करें
वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनके दिव्य स्वरूप की कल्पना करें
शुद्ध प्रेम और भक्ति पर मन को केंद्रित करें
आवाहन
श्री राधा रानी को पूजा स्थल पर पधारने हेतु आमंत्रित करें
भक्ति भाव से पुष्प अर्पित करें
'ॐ श्री राधायै नमः' मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें
आसन एवं पाद्य
प्रतीकात्मक आसन स्वरूप पुष्प अर्पित करें
स्वागत और शुद्धिकरण हेतु स्वच्छ जल छिड़कें
स्नान (अभिषेक)
मूर्ति या चित्र पर हल्के से स्वच्छ जल छिड़कें
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) अर्पित करें
मूर्ति को स्वच्छ वस्त्र से धीरे-धीरे पोंछें
अलंकार
चंदन, कुमकुम और हल्दी अर्पित करें
लाल, गुलाबी और पीले फूलों से सजाएँ
यदि उपलब्ध हो तो आभूषण या श्रृंगार सामग्री अर्पित करें
पुष्पांजलि
हाथ जोड़कर पुष्प अर्पित करें
दिव्य प्रेम, भक्ति, सुख और शांति की प्रार्थना करें
नैवेद्य (भोग)
मिठाई, फल, दूध, खीर और सात्त्विक भोजन अर्पित करें
संभव हो तो भोग में तुलसी पत्र अवश्य शामिल करें
भक्ति भाव से भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाएँ
घी का दीपक प्रज्वलित करें
यदि उपलब्ध हो तो कपूर से आरती करें
मंत्र जाप
'ॐ श्री राधायै नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें
'राधे राधे' का निरंतर भक्ति भाव से कीर्तन करें
संभव हो तो राधा चालीसा या भजन का पाठ करें
आरती
भक्ति भाव से श्री राधा रानी की आरती करें
दीपक को देवी के समक्ष गोलाकार घुमाएँ
'जय श्री राधे' भजन गाएँ
प्रदक्षिणा
वेदी या पूजा स्थल की 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम (अंतिम प्रार्थना)
श्री राधा रानी को प्रणाम करें
शुद्ध प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त करें
प्रसाद वितरण
मिठाई और प्रसाद परिवार एवं भक्तों में वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
राधाष्टमी, जन्माष्टमी और पूर्णिमा के दिन श्री राधा रानी की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। पूजा में विधि से अधिक सच्ची भक्ति, प्रेम और हृदय की पवित्रता का महत्व होता है। भक्ति परंपरा में 'राधे राधे' का नाम-स्मरण अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

