संतोषी माता पूजा विधि

संतोषी माता पूजा विधि

मां संतोषी की पूजा श्रद्धा, सादगी और संतोष भाव से की जाती है। मां संतोषी को सुख, शांति, संतोष और परिवार की समृद्धि प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। सच्चे मन और भक्ति से की गई संतोषी माता की पूजा जीवन की बाधाओं को दूर कर मनोकामनाएं पूर्ण करती है।

तैयारी

  • प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें

  • पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें

  • मां संतोषी का चित्र या मूर्ति स्वच्छ आसन पर स्थापित करें

  • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें

  • पूजा के समय मन को शांत और पवित्र रखें

आवश्यक सामग्री

  • मां संतोषी का चित्र या मूर्ति

  • गुड़ और चने

  • फूल

  • अगरबत्ती

  • दीपक

  • कुमकुम

  • हल्दी

  • चंदन

  • फल

  • नारियल

  • अक्षत (चावल)

  • जल पात्र

संकल्प

  • शांत मन से बैठकर पूजा और व्रत का संकल्प लें

  • परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें

  • मां संतोषी से मनोकामना पूर्ण होने की कामना करें

ध्यान

  • नेत्र बंद करके मां संतोषी का स्मरण करें

  • उनके शांत, कृपालु और दिव्य स्वरूप का ध्यान करें

  • कुछ समय तक मन को भक्ति में एकाग्र रखें

आवाहन

  • मां संतोषी को पूजा स्वीकार करने हेतु आमंत्रित करें

  • ‘ॐ संतोष्यै नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें

आसन एवं पाद्य

  • माता को पुष्प अर्पित करके आसन समर्पित करें

  • शुद्ध जल अर्पित कर स्वागत करें

स्नान

  • मूर्ति पर स्वच्छ जल अर्पित करें

  • इच्छानुसार पंचामृत से स्नान कराकर पुनः जल से शुद्ध करें

अलंकार

  • हल्दी, कुमकुम और चंदन अर्पित करें

  • फूल अर्पित करें

नैवेद्य

  • गुड़ और चने का विशेष भोग लगाएं

  • फल और मिठाई अर्पित करें

  • भक्ति भाव से माता को भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें

धूप एवं दीप

  • अगरबत्ती जलाकर धूप अर्पित करें

  • घी का दीपक प्रज्वलित करें

व्रत कथा एवं आरती

  • संतोषी माता व्रत कथा का पाठ करें

  • मां संतोषी की आरती गाएं

  • दीपक को गोलाकार घुमाकर आरती करें

प्रदक्षिणा

  • मूर्ति या पूजा स्थान की 1 या 3 बार परिक्रमा करें

प्रणाम

  • मां संतोषी को प्रणाम करके आशीर्वाद प्राप्त करें

  • सुख, संतोष और समृद्धि की प्रार्थना करें

प्रसाद वितरण

  • गुड़-चना और फल प्रसाद रूप में वितरित करें

महत्वपूर्ण निर्देश

संतोषी माता का व्रत विशेष रूप से शुक्रवार को किया जाता है। व्रत और पूजा के दिन खट्टी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। गुड़ और चने का भोग अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा में श्रद्धा, संतोष और सच्ची भक्ति का विशेष महत्व होता है।

पाठ पूर्ण

जब आप तैयार हों, दूसरा पाठ जारी रखें या देवता पेज पर लौटें।

सनातन धर्म का प्रकाश आगे बढ़ाएं

एक साझा किया हुआ पाठ किसी और घर में भक्ति की शुरुआत बन सकता है।