शनि देव मंत्र

शनि देव मंत्र

शांत भाव से बैठें, श्वास को संतुलित रखें, और भय नहीं बल्कि विनम्रता के साथ जप करें। तिल के तेल का दीपक जलाकर शनिवार को जप करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

मूल मंत्र

ॐ शं शनैश्चराय नमः

दैनिक स्मरण, धैर्य और मानसिक बोझ से राहत के लिए।

१०८ बार

बीज मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

गहन शनि साधना और शनिवार के विशेष जप के लिए।

२१ या १०८ बार

वैदिक मंत्र

नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम्।छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

श्रद्धा और स्पष्टता के साथ शनि देव का आवाहन करने हेतु।

११ बार

शनि गायत्री मंत्र

ॐ काकध्वजाय विद्महे।खड्ग हस्ताय धीमहि।तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥

सत्प्रवृत्ति, सहनशक्ति और अनुशासित जीवन के लिए।

११ बार

मार्गदर्शन

शनि देव सत्य आचरण, विनम्रता, सेवा और आत्मसंयम से विशेष प्रसन्न होते हैं। आपका जप आपके व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।

पाठ पूर्ण

जब आप तैयार हों, दूसरा पाठ जारी रखें या देवता पेज पर लौटें।

सनातन धर्म का प्रकाश आगे बढ़ाएं

एक साझा किया हुआ पाठ किसी और घर में भक्ति की शुरुआत बन सकता है।