शारदा माता, जिन्हें देवी सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है, ज्ञान, बुद्धि, विद्या, संगीत और कला की देवी हैं। उनकी पूजा शिक्षा में सफलता, वाणी की शुद्धता, रचनात्मक प्रतिभा और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए की जाती है। शारदा पूजा विशेष रूप से बसंत पंचमी, नवरात्रि तथा परीक्षा या किसी महत्वपूर्ण अध्ययन कार्य से पहले की जाती है।
तैयारी
सुबह जल्दी स्नान करें
सफेद या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
शारदा माता (सरस्वती) की मूर्ति या चित्र को सफेद या पीले कपड़े पर स्थापित करें
वेदी के पास पुस्तकें, कलम, वाद्य यंत्र या वीणा रखें
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
आवश्यक सामग्री
शारदा माता की मूर्ति या चित्र
सफेद या पीला वस्त्र
सफेद पुष्प (कमल, चमेली, गेंदा)
अगरबत्ती
घी का दीपक (दीया)
चंदन
कुमकुम, हल्दी, अक्षत
फल और मिठाई (विशेषकर खीर)
नारियल
पान के पत्ते और सुपारी
पुस्तकें या नोटबुक
वीणा या कोई भी वाद्य यंत्र (यदि उपलब्ध हो)
संकल्प
शांत मन से बैठकर संकल्प लें
ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा में सफलता और रचनात्मक प्रतिभा की प्रार्थना करें
पूजा विधि के चरण
दीपक और अगरबत्ती जलाएँ
सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें
शारदा माता को पुष्प, चंदन, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें
जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करें
खीर, फल और मिठाई नैवेद्य के रूप में अर्पित करें
आशीर्वाद के लिए पुस्तकें और वाद्य यंत्र उनके चरणों में रखें
श्रद्धापूर्वक शारदा माता के मंत्रों का जप करें
मुख्य मंत्र
ॐ शारदायै नमः
ॐ सरस्वत्यै नमः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं सरस्वत्यै नमः
इनमें से किसी भी मंत्र का 108 बार जप करें
आरती और परिक्रमा
श्रद्धा के साथ शारदा माता की आरती करें
वेदी की 3, 7 या 11 बार परिक्रमा करें
प्रणाम और समापन
शारदा माता को प्रणाम कर ज्ञान और बुद्धि की प्रार्थना करें
आशीर्वाद के लिए पुस्तकें और वाद्य यंत्र उनके चरणों से स्पर्श कराएँ
प्रसाद को परिवार के सदस्यों में वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
शारदा माता की पूजा विशेष रूप से बसंत पंचमी, वसंत पंचमी और बुधवार के दिन अत्यंत शुभ मानी जाती है। सफेद और पीले रंग का विशेष महत्व है। यह पूजा विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों, संगीतकारों और लेखकों के लिए अत्यंत लाभकारी है। पूजा के दौरान मन और शरीर की शुद्धता बनाए रखें। मांसाहार से परहेज करें और पूर्ण श्रद्धा के साथ पूजा करें।

