विश्वकर्मा जी पूजा विधि

विश्वकर्मा जी पूजा विधि

भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के दिव्य वास्तुकार और शिल्पकार हैं। कौशल, व्यवसाय में सफलता, औजारों और मशीनों की सुरक्षा तथा कार्यक्षेत्र और रचनात्मकता में उन्नति के लिए उनकी पूजा की जाती है। विश्वकर्मा जयंती पर विशेष रूप से विश्वकर्मा पूजा की जाती है।

तैयारी

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें

  • घर, कार्यस्थल, कारखाने, औजारों और मशीनों की अच्छी तरह सफाई करें

  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें

  • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा के लिए स्वच्छ स्थान तैयार करें

  • भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें (संभव हो तो भगवान विष्णु का चित्र भी रखें)

पूजा सामग्री

  • भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र

  • लाल या पीला कपड़ा

  • पुष्प और मालाएं

  • धूप या अगरबत्ती

  • घी का दीपक

  • कुमकुम, हल्दी और चंदन

  • अक्षत (कच्चे चावल)

  • जल से भरा कलश, नारियल और आम के पत्ते

  • फल, मिठाई और पंचामृत

  • पान के पत्ते और सुपारी

  • पूजन के लिए औजार और मशीनें

  • रंगोली की सामग्री

संकल्प

  • पूर्व दिशा की ओर मुख करके शांत भाव से बैठें

  • पूजा का संकल्प लें

  • कार्य में सफलता, कौशल विकास तथा औजारों और व्यवसाय की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें

पूजा विधि

  • दीपक और धूप जलाएं

  • विघ्न दूर करने के लिए सबसे पहले भगवान गणेश का आवाहन करें

  • भगवान विश्वकर्मा को पुष्प, अक्षत, हल्दी और कुमकुम अर्पित करें

  • जल या पंचामृत से अभिषेक करें

  • फल, मिठाई, नारियल और पान के पत्ते नैवेद्य के रूप में अर्पित करें

  • सभी औजारों, मशीनों और वाहनों पर तिलक और अक्षत लगाएं

  • विश्वकर्मा जी के मंत्रों का जप करें

मुख्य मंत्र

  • ॐ विश्वकर्मणे नमः

  • ॐ श्री सृष्टनाय सर्वसिद्धाय विश्वकर्माय नमो नमः

  • उपरोक्त मंत्रों में से किसी एक का 108 बार या अपनी सुविधा के अनुसार जप करें

आरती और परिक्रमा

  • श्रद्धा से विश्वकर्मा जी की आरती करें

  • पूजा स्थल की 3 या 7 बार परिक्रमा करें

प्रणाम और समापन

  • प्रणाम करके आशीर्वाद, कौशल, सफलता और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें

  • परिवार के सदस्यों और कर्मचारियों में प्रसाद बांटें

महत्वपूर्ण निर्देश

विश्वकर्मा जयंती (आमतौर पर सितंबर में) पर विश्वकर्मा पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है। स्वच्छता तथा औजारों और उपकरणों के प्रति सम्मान बहुत महत्वपूर्ण है। यह पूजा अभियंताओं, वास्तुकारों, कलाकारों, शिल्पकारों, कारखाना मालिकों और विद्यार्थियों के लिए विशेष लाभकारी मानी जाती है। पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ पूजा करें।

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