यम देव आरती

यम देव आरती

जय यमराज देव, जय धर्मराज।न्याय के दाता, जग के सरताज॥

दक्षिण दिशा के तुम हो स्वामी।सत्य न्याय के अंतर्यामी॥

पाप पुण्य का लेखा करते।जीव जगत का भार हो धरते॥

जय यमराज देव, जय धर्मराज।न्याय के दाता, जग के सरताज॥

महिषासन पर विराजमान हो।हाथ में दंड और पाश महान हो॥

चित्रगुप्त तुम्हारे सहायक।कर्म लेखे के तुम हो नायक॥

जय यमराज देव, जय धर्मराज।न्याय के दाता, जग के सरताज॥

काले वस्त्र धारण करते हो।यमदूतों को आज्ञा देते हो॥

धर्म की रक्षा सदा करो तुम।अधर्मी को दंड भरो तुम॥

जय यमराज देव, जय धर्मराज।न्याय के दाता, जग के सरताज॥

सूर्यपुत्र तुम कहलाते हो।शनि देव के भाई कहाते हो॥

माता छाया के लाल प्यारे।त्रिलोकी में तुम सबसे न्यारे॥

जय यमराज देव, जय धर्मराज।न्याय के दाता, जग के सरताज॥

यमुना बहन तुम्हारी प्यारी।भाई दूज पर्व की रीत निराली॥

बहन के हाथों तिलक लगाते।आशीष देकर भक्तों को भाते॥

जय यमराज देव, जय धर्मराज।न्याय के दाता, जग के सरताज॥

नचिकेता को ज्ञान दिया था।जीव जगत का सार दिया था॥

कठोपनिषद में यश तुम्हारा।वेद पुराणों में नाम तुम्हारा॥

जय यमराज देव, जय धर्मराज।न्याय के दाता, जग के सरताज॥

सत्यवान की रक्षा की तुमने।सावित्री की भक्ति मानी तुमने॥

पतिव्रता को जीवन दान दिया।धर्म की महिमा जग में किया॥

जय यमराज देव, जय धर्मराज।न्याय के दाता, जग के सरताज॥

मृत्युलोक के तुम अधिकारी।जीव की गति के तुम हो कारी॥

पुण्यात्मा को स्वर्ग पहुँचाते।पापी को नरक द्वार दिखाते॥

जय यमराज देव, जय धर्मराज।न्याय के दाता, जग के सरताज॥

दीपावली और भाई दूज पर।तुम्हारा पूजन होत घर-घर॥

जो भक्त तुम्हें शीश नवाये।अकाल मृत्यु का भय न सताये॥

जय यमराज देव, जय धर्मराज।न्याय के दाता, जग के सरताज॥

पाठ पूर्ण

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