भगवान यमराज की पूजा धर्म, न्याय, दीर्घायु और पापों से मुक्ति की कामना के लिए की जाती है। यम देव को मृत्यु के देवता और धर्म के रक्षक माना जाता है। श्रद्धा और सच्ची भक्ति से की गई यमराज पूजा जीवन में सदाचार, भय से मुक्ति और आत्मिक शांति प्रदान करती है।
तैयारी
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
भगवान यमराज का चित्र या प्रतीक स्वच्छ आसन पर स्थापित करें
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें
मन को शांत और एकाग्र रखें
आवश्यक सामग्री
भगवान यमराज का चित्र या प्रतीक
काले तिल
सरसों का तेल
दीपक
फूल
अगरबत्ती
कुमकुम
हल्दी
चंदन
अक्षत (चावल)
फल
मिठाई
जल पात्र
संकल्प
शांत मन से बैठकर पूजा का संकल्प लें
दीर्घायु, सदाचार और परिवार की रक्षा की प्रार्थना करें
भगवान यमराज से पापों से मुक्ति और धर्म मार्ग पर चलने की कामना करें
ध्यान
नेत्र बंद करके भगवान यमराज का स्मरण करें
उनके न्यायप्रिय और तेजस्वी स्वरूप का ध्यान करें
कुछ समय तक मन को मंत्र जाप में एकाग्र रखें
आवाहन
भगवान यमराज को पूजा स्वीकार करने हेतु आमंत्रित करें
‘ॐ यमाय नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें
आसन एवं पाद्य
पुष्प अर्पित करके भगवान को आसन समर्पित करें
शुद्ध जल अर्पित कर स्वागत करें
स्नान
चित्र या प्रतीक पर स्वच्छ जल अर्पित करें
इच्छानुसार पंचामृत से स्नान कराकर पुनः जल से शुद्ध करें
अलंकार
हल्दी, कुमकुम और चंदन अर्पित करें
फूल और अक्षत चढ़ाएं
नैवेद्य
फल और मिठाई अर्पित करें
भक्ति भाव से भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाकर धूप अर्पित करें
सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें
मंत्र जाप
‘ॐ धर्मराजाय नमः’ मंत्र का जाप करें
इच्छानुसार 108 बार मंत्र जाप करें
आरती
भगवान यमराज की आरती गाएं
दीपक को गोलाकार घुमाकर श्रद्धा भाव से आरती करें
प्रदक्षिणा
पूजा स्थान की 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम
भगवान यमराज को प्रणाम करके आशीर्वाद प्राप्त करें
धर्म, दीर्घायु और भय से मुक्ति की प्रार्थना करें
प्रसाद वितरण
फल और मिठाई प्रसाद रूप में वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
भगवान यमराज की पूजा विशेष रूप से यम द्वितीया, धनतेरस और दीपावली के समय शुभ मानी जाती है। दक्षिण दिशा और सरसों के तेल के दीपक का विशेष महत्व होता है। पूजा में सत्य, सदाचार और श्रद्धा का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

