मां यमुना की पूजा शुद्धता, श्रद्धा और भक्ति भाव से की जाती है। यमुना माता को पवित्रता, प्रेम, सुख-समृद्धि और पापों के नाश की देवी माना जाता है। सच्चे मन से की गई यमुना पूजा जीवन में शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
तैयारी
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
मां यमुना की मूर्ति, चित्र या कलश स्थापित करें
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
मन को शांत और पवित्र रखें
आवश्यक सामग्री
मां यमुना का चित्र या मूर्ति
स्वच्छ जल
फूल
अगरबत्ती
दीपक
कुमकुम
हल्दी
चंदन
फल
मिठाई
तुलसी पत्ते
नारियल
अक्षत (चावल)
संकल्प
शांत मन से पूजा करने का संकल्प लें
पापों के नाश, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करें
मां यमुना से शुद्धता और कृपा की प्रार्थना करें
ध्यान
नेत्र बंद करके मां यमुना का स्मरण करें
उनके शांत, दिव्य और पवित्र स्वरूप का ध्यान करें
कुछ समय तक मन को एकाग्र रखें
आवाहन
मां यमुना को पूजा स्वीकार करने हेतु आमंत्रित करें
‘ॐ यमुनायै नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें
आसन एवं पाद्य
पुष्प अर्पित करके माता को आसन समर्पित करें
शुद्ध जल अर्पित करके स्वागत करें
स्नान
मूर्ति या चित्र पर स्वच्छ जल अर्पित करें
इच्छानुसार पंचामृत से स्नान कराकर पुनः जल से शुद्ध करें
अलंकार
हल्दी, कुमकुम और चंदन अर्पित करें
फूल और तुलसी पत्ते अर्पित करें
नैवेद्य
फल, मिठाई और नारियल अर्पित करें
भक्ति भाव से भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाकर धूप अर्पित करें
घी या तेल का दीपक प्रज्वलित करें
आरती
मां यमुना की आरती गाएं
दीपक को गोलाकार घुमाकर आरती करें
प्रदक्षिणा
मूर्ति या पूजा स्थान की 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम
मां यमुना को प्रणाम करके आशीर्वाद प्राप्त करें
परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें
प्रसाद वितरण
फल और मिठाई प्रसाद रूप में वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
यमुना माता की पूजा विशेष रूप से यम द्वितीया, भाई दूज और कार्तिक मास में अत्यंत शुभ मानी जाती है। पूजा में स्वच्छता और पवित्रता का विशेष महत्व होता है। श्रद्धा और सच्ची भक्ति से की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

