अग्नि देव आरती

अग्नि देव आरती

जय जय अग्नि देवता, जय जय अग्नि देवता।हवन यज्ञ के देवा, पाप विनाश करता॥

॥ जय जय अग्नि देवता ॥

वेद-मंत्रों में पूजित, सप्त जिह्वा वाला।घृत-समिधा से तुष्ट हो, दो वरदान वाला॥

॥ जय जय अग्नि देवता ॥

विवाह की अग्नि के, सात फेरे लेते।अग्नि को साक्षी मानकर, शपथ सब लेते॥

॥ जय जय अग्नि देवता ॥

तीनों लोकों में व्याप्त, सर्वव्यापी देवा।देवताओं तक पहुँचाते, यज्ञ की सेवा॥

॥ जय जय अग्नि देवता ॥

अष्टौ वसुओं में एक, पावक नाम तुम्हारा।दक्षिण-पूर्व दिशा के, दिगपाल हैं तुम्हारा॥

॥ जय जय अग्नि देवता ॥

यज्ञ वेदी में वास, परम तेजस्वी।पापों का नाश करो, हे ज्ञान की असी॥

॥ जय जय अग्नि देवता ॥

अग्नि देव की आरती, जो कोई नर गावे।तन-मन-धन-ज्ञान की, ज्योति सब पावे॥

॥ जय जय अग्नि देवता ॥

पाठ पूर्ण

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