जय जय अग्नि देवता, जय जय अग्नि देवता।हवन यज्ञ के देवा, पाप विनाश करता॥
॥ जय जय अग्नि देवता ॥
वेद-मंत्रों में पूजित, सप्त जिह्वा वाला।घृत-समिधा से तुष्ट हो, दो वरदान वाला॥
॥ जय जय अग्नि देवता ॥
विवाह की अग्नि के, सात फेरे लेते।अग्नि को साक्षी मानकर, शपथ सब लेते॥
॥ जय जय अग्नि देवता ॥
तीनों लोकों में व्याप्त, सर्वव्यापी देवा।देवताओं तक पहुँचाते, यज्ञ की सेवा॥
॥ जय जय अग्नि देवता ॥
अष्टौ वसुओं में एक, पावक नाम तुम्हारा।दक्षिण-पूर्व दिशा के, दिगपाल हैं तुम्हारा॥
॥ जय जय अग्नि देवता ॥
यज्ञ वेदी में वास, परम तेजस्वी।पापों का नाश करो, हे ज्ञान की असी॥
॥ जय जय अग्नि देवता ॥
अग्नि देव की आरती, जो कोई नर गावे।तन-मन-धन-ज्ञान की, ज्योति सब पावे॥
॥ जय जय अग्नि देवता ॥

