अग्नि देव

अग्नि देव

ऋग्वेद का पहला सूक्त अग्नि को समर्पित है। इसके नौ मन्त्रों में अग्नि को यज्ञ का पुरोहित और होता कहकर प्रणाम किया गया है।

आहुति मंत्र

॥ ॐ अग्नये स्वाहा ॥

दिन

रविवार

रंग

केसरिया

भोग

हलवा

अग्नि देव की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

ऋग्वेद का पहला सूक्त अग्नि को समर्पित है। इसके नौ मन्त्रों में अग्नि को यज्ञ का पुरोहित और होता कहकर प्रणाम किया गया है।

अग्नि देव

ऋग्वेद का पहला सूक्त अग्नि को समर्पित है। इसके नौ मन्त्रों में अग्नि को यज्ञ का पुरोहित और होता कहकर प्रणाम किया गया है।
अग्नि से देवताओं को यज्ञ में लाने, उपासक का कल्याण करने और ऋत की रक्षा करने की प्रार्थना की जाती है। उनसे पिता की तरह सुलभ और हितकारी होने की कामना भी की गई है।

सनातन धर्म का प्रकाश आगे बढ़ाएं

एक साझा किया हुआ पाठ किसी और घर में भक्ति की शुरुआत बन सकता है।