अन्नपूर्णा माता के मन्त्र भोजन से पहले, अन्नदान के समय या दैनिक पूजा में कृतज्ञ भाव से जपे जा सकते हैं। इस साधना का मूल भाव अन्न का सम्मान और भूखे प्राणी के प्रति करुणा है।
सरल नमस्कार मन्त्र
ॐ अन्नपूर्णायै नमः
दैनिक स्मरण, भोजन से पूर्व कृतज्ञता एवं सरल पूजा के लिए
११ या २१ बार
अन्न समृद्धि मन्त्र
ॐ ह्रीं श्रीं अन्नपूर्णायै स्वाहा
घर में अन्न-धन की वृद्धि, भूख से मुक्ति एवं सुख-समृद्धि के लिए
५१ या १०८ बार
अन्नपूर्णा गायत्री मन्त्र
ॐ भगवत्यै विद्महे माहेश्वर्यै धीमहि तन्नो अन्नपूर्णा प्रचोदयात्
बुद्धि, स्वास्थ्य, आरोग्य एवं माँ की दिव्य कृपा प्राप्ति के लिए
२१ या १०८ बार
क्षुधा निवारण मन्त्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे ज्ञानवैराग्यसिद्धयर्थं भिक्षां देहि च पार्वति
जीवन में कभी अन्न की कमी न हो, निर्धनता निवारण एवं पोषण प्राप्ति के लिए
११ या ५१ बार
पूर्णाहुति सिद्धि मन्त्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं अन्नपूर्णे महेश्वरि सर्वसिद्धिं देहि देहि स्वाहा
सर्व मनोकामना पूर्ति, गृहसुख, पारिवारिक समृद्धि एवं आशीर्वाद प्राप्ति के लिए
५१ या १०८ बार
मार्गदर्शन
अन्नपूर्णा माता का सम्मान करने का श्रेष्ठ मार्ग है अन्न की बर्बादी से बचना और यथासम्भव जरूरतमंद को भोजन कराना।

