जय तिरुपति बालाजी, जय वेंकटरमणा।
सप्तगिरि के वासी, जय श्रीनिवासा॥
जय जय बालाजी, जय वेंकटेशा।
तिरुमलाधीशा प्रभु, पूर्ण करो आशा॥
शंख चक्र गदा पद्म, चतुर्भुज धारी।
पीतांबर शोभित तन, वैकुंठ विहारी॥
लक्ष्मी संग विराजित, जगपालन कर्ता।
सेवक जन रक्षक प्रभु, संकट हर्ता॥
जय जय बालाजी, जय वेंकटेशा।
तिरुमलाधीशा प्रभु, पूर्ण करो आशा॥
अलमेलू मंगा वल्लभ, पद्मावती रानी।
श्री निवास नाम तेरा, महिमा है बखानी॥
ब्रह्मा ने रचा जग सारा, विष्णु पालनहारा।
तुम हो प्रभु त्रिभुवन के, जग से न्यारा॥
जय जय बालाजी, जय वेंकटेशा।
तिरुमलाधीशा प्रभु, पूर्ण करो आशा॥
सात पहाड़ों के स्वामी, गोविंदा गोविंदा।
भक्तों के दुख हरते हो, गोविंदा गोविंदा॥
धन धान्य समृद्धि दाता, गोविंदा गोविंदा।
मोक्ष प्रदाता प्रभु तुम, गोविंदा गोविंदा॥
जय जय बालाजी, जय वेंकटेशा।
तिरुमलाधीशा प्रभु, पूर्ण करो आशा॥
तिरुपति बालाजी की आरती जो कोई गावे।
वेंकटेश कृपा से वो सुख संपत्ति पावे॥
जय तिरुपति बालाजी, जय वेंकटरमणा।
जय जय श्री वेंकटेशा, जय श्रीनिवासा॥
जय जय बालाजी, जय वेंकटेशा।
तिरुमलाधीशा प्रभु, पूर्ण करो आशा॥

