भैरव बाबा की पूजा सुरक्षा, साहस, भय नाश और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है। श्रद्धा और सच्ची भक्ति से की गई काल भैरव की आराधना जीवन में शक्ति, आत्मविश्वास और शांति प्रदान करती है।
तैयारी
प्रातः या रात्रि में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ और पवित्र करें
भैरव बाबा की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें
उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें
आवश्यक सामग्री
भैरव बाबा की मूर्ति या चित्र
लाल या काले फूल
कुमकुम, हल्दी और चंदन
सरसों के तेल का दीपक
अगरबत्ती
नारियल
फल
मिठाई
जल पात्र
काले तिल
उड़द दाल
भैरव बाबा को प्रिय प्रसाद (जैसे जलेबी या मीठा भोग)
संकल्प
शांत मन से भैरव बाबा की पूजा करने का संकल्प लें
भय, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की प्रार्थना करें
ध्यान
नेत्र बंद करके काल भैरव के तेजस्वी स्वरूप का ध्यान करें
उनके रक्षक और शक्तिशाली रूप का स्मरण करें
कुछ मिनट तक मन को एकाग्र रखें
आवाहन
भैरव बाबा को पूजा स्वीकार करने हेतु आमंत्रित करें
‘ॐ काल भैरवाय नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जप करें
आसन एवं पाद्य
आसन रूप में पुष्प अर्पित करें
स्वागत और शुद्धि हेतु जल अर्पित करें
स्नान
मूर्ति पर स्वच्छ जल अर्पित करें
इच्छानुसार पंचामृत से स्नान कराकर पुनः जल से शुद्ध करें
अलंकार
चंदन, हल्दी और कुमकुम लगाएं
फूल और काले तिल अर्पित करें
नैवेद्य
जलेबी, मिठाई और फल अर्पित करें
भक्ति भाव से भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाएं
सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें
मंत्र जाप
‘ॐ काल भैरवाय नमः’ मंत्र का जाप करें
इच्छानुसार काल भैरव अष्टक का पाठ करें
आरती
भैरव बाबा की आरती गाएं
दीपक को गोलाकार घुमाकर श्रद्धा पूर्वक आरती करें
प्रदक्षिणा
मूर्ति या पूजा स्थान के चारों ओर 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम
भैरव बाबा को प्रणाम करके आशीर्वाद प्राप्त करें
सुरक्षा, साहस और भय नाश की प्रार्थना करें
प्रसाद वितरण
मिठाई और फल प्रसाद रूप में वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
भैरव बाबा की पूजा विशेष रूप से रविवार और मंगलवार को शुभ मानी जाती है। काल भैरव अष्टमी का दिन उनकी आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। पूजा में सरसों के तेल का दीपक और सच्ची श्रद्धा का विशेष महत्व होता है।

