गणेश जी की पूजा शुद्धता, सरलता और सच्ची भक्ति के साथ सबसे प्रभावी मानी जाती है।
तैयारी
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
गणेश जी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
आवश्यक सामग्री
भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र
फूल (विशेष रूप से लाल)
दूर्वा घास
मोदक या मिठाई
फल
अगरबत्ती
दीपक
कुमकुम, हल्दी, चंदन
जल पात्र
नारियल (वैकल्पिक)
संकल्प
शांत मन से बैठकर भक्ति भाव से पूजा करने का संकल्प लें
बुद्धि, सफलता और विघ्नों के नाश की प्रार्थना करें
ध्यान
नेत्र बंद करके भगवान गणेश का स्मरण करें
उनके गजमुख, विशाल उदर और शांत स्वरूप का ध्यान करें
कुछ मिनट तक मन को एकाग्र करें
आवाहन
गणेश जी को पूजा स्वीकार करने हेतु आमंत्रित करें
‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र 11 या 21 बार जपें
आसन एवं पाद्य
आसन रूप में एक पुष्प अर्पित करें
स्वागत और शुद्धि हेतु जल छिड़कें
स्नान
मूर्ति पर स्वच्छ जल अर्पित करें
इच्छानुसार दूध से स्नान कराकर पुनः जल से शुद्ध करें
अलंकार
हल्दी, कुमकुम और चंदन लगाएं
फूल और दूर्वा अर्पित करें
नैवेद्य
मोदक, मिठाई और फल अर्पित करें
भक्ति भाव से भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाएं
दीपक प्रज्वलित करें
आरती
‘जय गणेश जय गणेश देवा’ आरती गाएं
दीपक को गोलाकार घुमाकर आरती करें
प्रदक्षिणा
मूर्ति के चारों ओर 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम
नमस्कार करके आशीर्वाद प्राप्त करें
विघ्नों के नाश और सफलता की प्रार्थना करें
प्रसाद वितरण
मिठाई और फल प्रसाद रूप में बांटें
महत्वपूर्ण निर्देश
गणेश पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व है। तुलसी पत्र अर्पित न करें। बुधवार और गणेश चतुर्थी अत्यंत शुभ माने जाते हैं। पूजा में विधि से अधिक भक्ति और श्रद्धा का महत्व है।

