गरुड़ देव आरती

गरुड़ देव आरती

ॐ जय गरुड़ देवा, प्रभु जय गरुड़ देवा। विष्णु वाहन सुखकारी, निज भक्तन सेवा

ॐ जय गरुड़ देवा

पंख विशाल तिहारे, वेग अतिशय भारी। सुर-असुर सब कांपत, देख गति तुम्हारी

ॐ जय गरुड़ देवा

अमृत कुंभ लाये, देवों को सुख दीन्हा। नागों का मद उतारा, पाताल में कीन्हा

ॐ जय गरुड़ देवा

कश्यप ऋषि के नंदन, विनता के प्यारे। दुष्टों को संहारे, भक्तन के सहारे

ॐ जय गरुड़ देवा

पीतांबर धारी, पीत मुकुट शोभा। कमंडल हाथ सोहत, मन को अति मोहा

ॐ जय गरुड़ देवा

गरुड़ पुराण रच्यो, ज्ञान की धारा। मोक्ष मार्ग दिखलाओ, भव सिंधु पारा

ॐ जय गरुड़ देवा

जो नर आरती गावे, श्रद्धा मन लाये। गरुड़ कृपा से तर जाए, भव बंधन जाए

ॐ जय गरुड़ देवा

यह आरती पूर्ण करे, सब कष्ट हरे। सुख-संपत्ति बढ़े घर, भक्ति से भरे

ॐ जय गरुड़ देवा

सनातन धर्म का प्रकाश आगे बढ़ाएं

एक साझा किया हुआ पाठ किसी और घर में भक्ति की शुरुआत बन सकता है।