वर्षा, जल, अन्न और प्राकृतिक संतुलन के प्रति कृतज्ञता रखते हुए इन्द्र देव के मन्त्र जपें। प्रार्थना विनम्र रखें, क्योंकि विनय के बिना शक्ति असंतुलित हो जाती है।
सरल नमस्कार मन्त्र
ॐ इन्द्राय नमः
इन्द्र देव के दैनिक स्मरण एवं सरल पूजा के लिए
11 या 21 बार
वज्रपाणि मन्त्र
ॐ वज्रपाणये इन्द्राय स्वाहा
शत्रु नाश, भय से मुक्ति एवं शक्ति प्राप्ति के लिए
108 बार
वर्षा प्राप्ति मन्त्र
ॐ ह्रीं इन्द्राय वर्षं देहि देहि स्वाहा
वर्षा की कामना, सूखे से मुक्ति एवं कृषि समृद्धि के लिए
51 या 108 बार
देवेन्द्र गायत्री मन्त्र
ॐ सहस्रनेत्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात्
बुद्धि, ऐश्वर्य, नेतृत्व शक्ति एवं दिव्य कृपा प्राप्ति के लिए
21 या 108 बार
सुरपति स्तुति मन्त्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं इन्द्राय देवराजाय फट् स्वाहा
राज्य सुख, उच्च पद प्राप्ति, समृद्धि एवं सर्व कार्य सिद्धि के लिए
51 या 108 बार
मार्गदर्शन
मन्त्र-जप से जल-संरक्षण, नेतृत्व में विनम्रता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता भी बढ़नी चाहिए।

