भगवान कार्तिकेय (स्कंद, मुरुगन) की पूजा साहस, बुद्धि, विजय, आत्मविश्वास और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। वे भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र तथा देवताओं के सेनापति हैं। कार्तिकेय जी सच्ची भक्ति, अनुशासन और साहस से प्रसन्न होते हैं। मंगलवार और षष्ठी तिथि उनकी पूजा के लिए विशेष शुभ मानी जाती है।
तैयारी
प्रातः जल्दी उठें
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें (लाल या पीले वस्त्र शुभ माने जाते हैं)
मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखें
पूजा स्थान को साफ और शांत रखें
कार्तिकेय जी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें
दीपक और पूजा सामग्री तैयार रखें
षष्ठी तिथि या मंगलवार का दिन विशेष शुभ माना जाता है
पूजन सामग्री
भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र
लाल या पीले पुष्प
चंदन
अक्षत (चावल)
धूप / अगरबत्ती
घी का दीपक
जल से भरा पात्र
फल
प्रसाद (लड्डू या मिठाई)
नारियल
पान के पत्ते (वैकल्पिक)
घंटी
कार्तिकेय स्तोत्र / आरती पुस्तक
संकल्प
- 1
कार्तिकेय जी के सामने शांत भाव से बैठें
- 2
हाथ जोड़कर नेत्र बंद करें
- 3
पूजा का संकल्प लें
- 4
साहस, बुद्धि, सफलता और रक्षा की प्रार्थना करें
आवाहन
- 1
घी का दीपक और धूप जलाएं
- 2
घंटी बजाएं
- 3
भगवान कार्तिकेय का ध्यान करें
- 4
मंत्र जप करें:
- 5
ॐ सरवनभवाय नमः
- 6
या जप करें:
- 7
ॐ स्कन्दाय नमः
पूजा विधि
- 1
भगवान कार्तिकेय को जल अर्पित करें
- 2
चंदन का तिलक लगाएं
- 3
लाल या पीले पुष्प अर्पित करें
- 4
धूप और दीप अर्पित करें
- 5
फल और प्रसाद अर्पित करें
- 6
नारियल अर्पित करें
- 7
श्रद्धा से प्रार्थना करें और ध्यान करें
महत्वपूर्ण
भगवान कार्तिकेय साहस, अनुशासन और धर्म पालन से अत्यंत प्रसन्न होते हैं। सच्चे मन से की गई पूजा से भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।
मंत्र जप और पाठ
- 1
निम्न में से कोई एक या सभी का पाठ करें
- 2
कार्तिकेय स्तोत्र
- 3
स्कन्द षष्ठी कवचम्
- 4
कार्तिकेय चालीसा
- 5
ॐ सरवनभवाय नमः (108 बार जप)
- 6
ॐ स्कन्दाय नमः (108 बार जप)
आरती
- 1
दीपक से आरती करें
- 2
कार्तिकेय जी की आरती गाएं
- 3
घंटी बजाएं
- 4
भक्ति भाव से प्रार्थना करें
प्रसाद वितरण
- 1
पहले भगवान कार्तिकेय को भोग लगाएं
- 2
कुछ क्षण ध्यान करें
- 3
परिवार में प्रसाद बांटें
- 4
श्रद्धा से ग्रहण करें
पूजा के बाद दान (वैकल्पिक किन्तु शुभ)
- 1
लाल वस्त्र दान करें
- 2
फल या मिठाई दान करें
- 3
गरीब और जरूरतमंदों की सहायता करें
- 4
बच्चों को भोजन या वस्त्र दें
- 5
पक्षियों को दाना डालें
महत्वपूर्ण निर्देश
स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखें
क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
साहस और सत्य का पालन करें
नियमित पूजा और भक्ति बनाए रखें
बड़ों का सम्मान करें
धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखें

