लड्डू गोपाल का भोग सात्त्विक, स्वच्छ और प्रेम से बनाया हुआ होना चाहिए। बाल कृष्ण को माखन-मिश्री और मिठाई अत्यंत प्रिय हैं। भोग सदैव शुद्ध मन, स्वच्छ हाथों और भक्ति भाव से तैयार करें। परिवार की परंपरा अलग हो सकती है, इसलिए घर की विधि और गुरु आज्ञा का सदैव सम्मान करें।
नित्य भोग (प्रतिदिन)
- माखन मिश्री
- दूध (गाय का ताज़ा दूध)
- दही
- मिश्री
- तुलसी दल
- केला या कोई मौसमी फल
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, मिश्री)
विशेष भोग (त्योहार और उत्सव पर)
- लड्डू (बेसन या बूंदी)
- खीर
- पंजीरी
- मखाने की खीर
- धनिया पंजीरी
- मालपुआ
- हलवा (सूजी या आटे का)
- मिठाई (घर की बनी सात्त्विक)
- पेड़ा
- मेवा और किशमिश
फलाहार भोग (एकादशी और व्रत पर)
- ताज़े मौसमी फल
- साबूदाने की खीर
- कुट्टू का हलवा
- सिंघाड़े का हलवा
- मखाने की खीर
- नारियल की मिठाई
- शरबत या पंचामृत
भोग में वर्जित पदार्थ
- प्याज और लहसुन
- मांस, मछली और अंडा
- बासी या जूठा भोजन
- तामसिक और बाज़ारू खाद्य पदार्थ
- भोग से पहले चखा हुआ भोजन
- नमकीन या तीखा तला हुआ भोजन (नित्य भोग में)
भोग कैसे लगाएँ
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- पूजा स्थान और रसोई को स्वच्छ करें
- भोग सामग्री स्वच्छ थाली या कटोरी में सुंदर रूप से सजाएँ
- थाली में तुलसी दल अवश्य रखें
- लड्डू गोपाल के सामने थाली रखें और दीप-अगरबत्ती जलाएँ
- दोनों हाथ जोड़कर भोग मंत्र बोलें — 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, यह भोग स्वीकार करें प्रभु'
- कृष्ण नाम जपें या 10–15 मिनट शांत बैठें
- भोग हटाते समय पुनः प्रणाम करें
- भोग सामग्री को प्रसाद के रूप में परिवार में बाँटें
दिनभर के भोग का समय
- प्रातः — मंगला भोग: माखन मिश्री, दूध और फल
- दोपहर — राजभोग: सात्त्विक भोजन, खीर या हलवा
- संध्या — शयन भोग: दूध, मिश्री और हल्की मिठाई
ध्यान रखें
भोग लगाने से पहले भोजन कभी न चखें। भोग सदैव ताज़ा और घर में बना होना चाहिए। रसोई में भोग तैयार करते समय मन में कृष्ण नाम का स्मरण करें। स्वच्छता, श्रद्धा और प्रेम ही सर्वोत्तम भोग है — भगवान भाव के भूखे हैं, थाली के नहीं।

