लक्ष्मी माता की पूजा समृद्धि, शांति और सकारात्मकता के लिए की जाती है। इसे श्रद्धा, स्वच्छता और एकाग्र मन से करना चाहिए।
पूजा सामग्री
स्वच्छ चौकी पर लाल या पीला वस्त्र
लक्ष्मी माता की मूर्ति या चित्र
जल से भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल
दीपक और अगरबत्ती / धूप
फूल और माला
कुमकुम, हल्दी और अक्षत
फल और मिठाई (नैवेद्य)
पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर)
पान के पत्ते और सुपारी (वैकल्पिक)
आरती का दीपक
तैयारी
- 1
घर और विशेष रूप से पूजा स्थान की सफाई करें।
- 2
स्नान करके स्वच्छ या पारंपरिक वस्त्र पहनें।
- 3
चौकी रखकर उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
- 4
चौकी पर लक्ष्मी माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- 5
पास में जल से भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल रखें।
- 6
दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
- 7
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शांत भाव से बैठें।
संकल्प
- 1
दाएं हाथ में जल लें।
- 2
अपना नाम, तिथि और पूजा का उद्देश्य बोलें।
- 3
समृद्धि, शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
- 4
जल को थाली में छोड़ दें।
गणेश पूजा
- 1
भगवान गणेश को फूल अर्पित करें।
- 2
उनके सामने दीपक या अगरबत्ती जलाएं।
- 3
'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें।
- 4
विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें।
कलश स्थापना
- 1
कलश पर जल छिड़कें।
- 2
पवित्रता और दिव्य उपस्थिति का आह्वान करें।
- 3
इसे लक्ष्मी माता की मूर्ति के पास रखें।
लक्ष्मी आवाहन
- 1
लक्ष्मी माता को फूल अर्पित करें।
- 2
हाथ जोड़कर उनका स्वागत करें।
- 3
'ॐ महालक्ष्म्यै नमः, आवाहयामि' मंत्र बोलें।
पूजा अर्पण (षोडशोपचार)
- 1
आसन अर्पित करें।
- 2
पाद्य अर्पित करें।
- 3
अर्घ्य अर्पित करें।
- 4
आचमन हेतु जल अर्पित करें।
- 5
स्नान या अभिषेक करें (वैकल्पिक)।
- 6
वस्त्र अर्पित करें।
- 7
कुमकुम, हल्दी, चंदन लगाएं।
- 8
फूल अर्पित करें।
- 9
धूप दिखाएं।
- 10
दीप दिखाएं।
- 11
नैवेद्य (मिठाई/फल) अर्पित करें।
- 12
तांबूल अर्पित करें (वैकल्पिक)।
मंत्र एवं पाठ
- 1
'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें।
- 2
लक्ष्मी चालीसा या स्तोत्र का पाठ करें (वैकल्पिक)।
- 3
जाप के समय मन को एकाग्र रखें।
आरती
- 1
आरती का दीपक जलाएं।
- 2
'ॐ जय लक्ष्मी माता' आरती गाएं।
- 3
दीपक को गोल घुमाएं।
प्रदक्षिणा एवं प्रणाम
- 1
3 या 7 बार प्रदक्षिणा करें।
- 2
नमस्कार कर प्रणाम करें।
- 3
सच्चे मन से आशीर्वाद मांगें।
प्रसाद एवं समापन
- 1
अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
- 2
परिवार में प्रसाद बांटें।
- 3
दीपक कुछ समय तक जलने दें।
- 4
घर में शांत वातावरण बनाए रखें।
महत्वपूर्ण
संध्या समय, विशेषकर शुक्रवार और दीपावली का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। विधि से अधिक श्रद्धा और सच्चा भाव महत्वपूर्ण है।

