
लक्ष्मी माता
देवताओं और असुरों के समुद्र-मन्थन से अनेक रत्न प्रकट होते हैं। उन्हीं के बीच माँ लक्ष्मी प्रकट होती हैं। देवता और ऋषि उनका स्वागत करते हैं और पवित्र जल से उनका अभिषेक होता है।
सिद्धि मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:
दिन
शुक्रवार
रंग
लाल
भोग
खीर
पर्व
दीपावली
कोजागिरी लक्ष्मी पूजा
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लक्ष्मी माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व
अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।
देवताओं और असुरों के समुद्र-मन्थन से अनेक रत्न प्रकट होते हैं। उन्हीं के बीच माँ लक्ष्मी प्रकट होती हैं। देवता और ऋषि उनका स्वागत करते हैं और पवित्र जल से उनका अभिषेक होता है।
समुद्र-मन्थन में लक्ष्मी का प्राकट्य
देवताओं और असुरों के समुद्र-मन्थन से अनेक रत्न प्रकट होते हैं। उन्हीं के बीच माँ लक्ष्मी प्रकट होती हैं। देवता और ऋषि उनका स्वागत करते हैं और पवित्र जल से उनका अभिषेक होता है।
हाथ में कमल-माला लिए लक्ष्मी सभा में भगवान विष्णु को चुनती हैं। वे उनके गले में माला डालकर उनके पास खड़ी हो जाती हैं। लक्ष्मी और नारायण के इस मिलन पर देवता पुष्प-वर्षा करते हैं।
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