मां ललिता की पूजा प्रेम, सौंदर्य, शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति के लिए की जाती है। मां ललिता त्रिपुरा सुंदरी को आदिशक्ति का दिव्य स्वरूप माना जाता है। श्रद्धा, पवित्रता और सच्चे मन से की गई पूजा भक्त के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।
तैयारी
प्रातः स्नान करके स्वच्छ और हल्के लाल या गुलाबी वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
मां ललिता की मूर्ति, चित्र या श्री यंत्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
पूजा के समय मन को शांत और एकाग्र रखें
आवश्यक सामग्री
मां ललिता का चित्र या मूर्ति
श्री यंत्र (वैकल्पिक)
लाल या गुलाबी पुष्प
कुमकुम
हल्दी
चंदन
अगरबत्ती
घी का दीपक
फल
मिठाई
नारियल
अक्षत (चावल)
पान और सुपारी
जल पात्र
संकल्प
शांत मन से बैठकर पूजा का संकल्प लें
सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करें
मां ललिता से कृपा और संरक्षण की कामना करें
ध्यान
नेत्र बंद करके मां ललिता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें
उनके शांत, सुंदर और तेजस्वी रूप का स्मरण करें
कुछ समय तक मन को मंत्र जाप में एकाग्र रखें
आवाहन
मां ललिता को पूजा स्वीकार करने हेतु आमंत्रित करें
‘ॐ श्रीं ह्रीं ललिताम्बिकायै नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें
आसन एवं पाद्य
माता को पुष्प अर्पित करके आसन समर्पित करें
शुद्ध जल अर्पित करके स्वागत करें
स्नान
मूर्ति पर स्वच्छ जल अर्पित करें
इच्छानुसार पंचामृत से स्नान कराकर पुनः जल से शुद्ध करें
अलंकार
हल्दी, कुमकुम और चंदन अर्पित करें
लाल या गुलाबी पुष्प अर्पित करें
श्रृंगार सामग्री भक्ति भाव से चढ़ाएं
नैवेद्य
फल, मिठाई और नारियल अर्पित करें
भक्ति भाव से माता को भोग लगाएं
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाकर धूप अर्पित करें
घी का दीपक प्रज्वलित करें
मंत्र जाप
‘ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुन्दर्यै नमः’ मंत्र का जाप करें
इच्छानुसार 108 बार मंत्र जाप करें
आरती
मां ललिता की आरती गाएं
दीपक को गोलाकार घुमाकर आरती करें
प्रदक्षिणा
मूर्ति या श्री यंत्र के चारों ओर 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम
मां ललिता को प्रणाम करके आशीर्वाद प्राप्त करें
सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करें
प्रसाद वितरण
मिठाई और फल प्रसाद रूप में वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
मां ललिता की पूजा विशेष रूप से शुक्रवार, पूर्णिमा और नवरात्रि में अत्यंत शुभ मानी जाती है। श्री यंत्र की पूजा का विशेष महत्व होता है। पूजा में शुद्धता, संयम और श्रद्धा का पालन करें। विधि से अधिक सच्ची भक्ति का महत्व माना गया है।

