महावीर जाहरवीर के नाम

महावीर जाहरवीर के नाम

108 नाम

महावीर जाहरवीर के 108 नाम और उनके सरल अर्थ।

  1. 1

    महावीर जाहरवीर

    महावीर जाहरवीर का पूज्य स्वरूप, जो भक्तों की रक्षा और मार्गदर्शन करते हैं।

  2. 2

    जाहरवीर बाबा

    भक्तों के प्रिय बाबा, जो संकटों को दूर करते हैं।

  3. 3

    गोगाजी

    लोकदेवता स्वरूप, जिनकी पूजा श्रद्धा और विश्वास से की जाती है।

  4. 4

    जाहिर पीर

    जो अपने चमत्कारों और कृपा से प्रसिद्ध हैं।

  5. 5

    नागदेव संरक्षक

    जो सर्प भय और विष से रक्षा करते हैं।

  6. 6

    भक्तवत्सल

    जो अपने भक्तों से अत्यंत प्रेम करते हैं।

  7. 7

    दयामूर्ति

    जो दया और करुणा के स्वरूप हैं।

  8. 8

    संकटनाशक

    जो जीवन के संकटों का नाश करते हैं।

  9. 9

    मंगलकारी

    जो भक्तों के जीवन में मंगल लाते हैं।

  10. 10

    रक्षक

    जो सदैव भक्तों की रक्षा करते हैं।

  11. 11

    कृपासागर

    जो असीम कृपा के सागर हैं।

  12. 12

    कल्याणकारी

    जो भक्तों का कल्याण करते हैं।

  13. 13

    शुभप्रदाता

    जो शुभ फल और सफलता प्रदान करते हैं।

  14. 14

    तेजोमय

    जो दिव्य तेज से प्रकाशित हैं।

  15. 15

    आनंददायक

    जो भक्तों को सुख और आनंद प्रदान करते हैं।

  16. 16

    शांतिदायक

    जो मन को शांति और स्थिरता देते हैं।

  17. 17

    भक्तरक्षक

    जो अपने भक्तों को सभी विपत्तियों से बचाते हैं।

  18. 18

    धर्मपालक

    जो धर्म और सत्य की रक्षा करते हैं।

  19. 19

    वीरवर

    जो महान वीरता और पराक्रम के प्रतीक हैं।

  20. 20

    लोकदेव

    जो लोक आस्था और भक्ति के प्रमुख देवता हैं।

  21. 21

    भवभयहारक

    जो संसार के भय को दूर करते हैं।

  22. 22

    नागेश्वरप्रिय

    जो नागों के प्रिय और संरक्षक हैं।

  23. 23

    अमृतस्वरूप

    जो अमृत समान कृपा प्रदान करते हैं।

  24. 24

    परमदयालु

    जो अत्यंत दयालु और कृपालु हैं।

  25. 25

    सत्यप्रिय

    जो सत्य और धर्म को प्रिय मानते हैं।

  26. 26

    अचलभक्ति प्रिय

    जो अटूट श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होते हैं।

  27. 27

    सर्वमंगल

    जो सभी के लिए मंगलकारी हैं।

  28. 28

    पुण्यदाता

    जो पुण्य और शुभ फल प्रदान करते हैं।

  29. 29

    भक्तनायक

    जो भक्तों के मार्गदर्शक हैं।

  30. 30

    अनंतकृपा

    जो अनंत कृपा बरसाते हैं।

  31. 31

    भवसागर तारक

    जो संसार रूपी सागर से पार लगाते हैं।

  32. 32

    जगवंदित

    जिनकी सम्पूर्ण संसार में वंदना होती है।

  33. 33

    सद्गुणसागर

    जो उत्तम गुणों के सागर हैं।

  34. 34

    अपराजेय

    जिन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता।

  35. 35

    कष्टनिवारक

    जो भक्तों के कष्ट दूर करते हैं।

  36. 36

    विजयदाता

    जो जीवन में विजय और सफलता प्रदान करते हैं।

  37. 37

    दीनबंधु

    जो दीन और दुखियों के सहायक हैं।

  38. 38

    जगतपालक

    जो सम्पूर्ण जगत का पालन करते हैं।

  39. 39

    आश्रयदाता

    जो सभी को सुरक्षा और आश्रय देते हैं।

  40. 40

    मोक्षदाता

    जो भक्तों को मोक्ष प्रदान करते हैं।

  41. 41

    दुःखनाशक

    जो जीवन के दुःखों का नाश करते हैं।

  42. 42

    शुभमूर्ति

    जो शुभता और पवित्रता के प्रतीक हैं।

  43. 43

    ज्ञानदाता

    जो ज्ञान और विवेक प्रदान करते हैं।

  44. 44

    सिद्धिदाता

    जो सिद्धि और सफलता प्रदान करते हैं।

  45. 45

    अमरकीर्ति

    जिनकी महिमा अमर और अनंत है।

  46. 46

    नित्यकृपालु

    जो सदैव कृपा करने वाले हैं।

  47. 47

    त्रिलोकनाथ

    जो तीनों लोकों के स्वामी हैं।

  48. 48

    भक्ताधीन

    जो भक्तों के प्रेम से बंधे रहते हैं।

  49. 49

    दयानिधि

    जो दया और करुणा के भंडार हैं।

  50. 50

    विश्ववंद्य

    जिनकी सम्पूर्ण विश्व में पूजा होती है।

  51. 51

    भक्तहितकारी

    जो सदैव भक्तों का हित करते हैं।

  52. 52

    अखंडज्योति

    जो सदैव प्रकाशित रहने वाली दिव्य ज्योति हैं।

  53. 53

    मंगलमूर्ति

    जो मंगल और शुभता के प्रतीक हैं।

  54. 54

    अनुग्रहकारी

    जो भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं।

  55. 55

    महाशक्तिमान

    जो महान शक्ति और सामर्थ्य से युक्त हैं।

  56. 56

    सर्पसंरक्षक

    जो सर्पों और विष से रक्षा करते हैं।

  57. 57

    जगतगुरु

    जो सम्पूर्ण संसार के गुरु हैं।

  58. 58

    शुभाश्रय

    जो शुभता का आश्रय हैं।

  59. 59

    अविनाशी

    जो कभी नष्ट नहीं होते।

  60. 60

    अनंतशक्ति

    जो अनंत शक्ति से युक्त हैं।

  61. 61

    भक्तसखा

    जो भक्तों के सच्चे मित्र हैं।

  62. 62

    परमशांत

    जो परम शांति के स्वरूप हैं।

  63. 63

    जगदीश्वर

    जो सम्पूर्ण जगत के ईश्वर हैं।

  64. 64

    विश्वनाथ

    जो सम्पूर्ण संसार के स्वामी हैं।

  65. 65

    सर्वदाता

    जो सभी प्रकार के वरदान देने वाले हैं।

  66. 66

    सर्वेश्वर

    जो सभी देवों में श्रेष्ठ हैं।

  67. 67

    पापनाशक

    जो भक्तों के पापों का नाश करते हैं।

  68. 68

    आशीर्वाददाता

    जो भक्तों को दिव्य आशीर्वाद देते हैं।

  69. 69

    जगबंधु

    जो सम्पूर्ण संसार के हितैषी हैं।

  70. 70

    परित्राता

    जो भक्तों का उद्धार करते हैं।

  71. 71

    नागरक्षक

    जो नागों और जीवों की रक्षा करते हैं।

  72. 72

    अद्भुतरूप

    जिनका स्वरूप अत्यंत अद्भुत और दिव्य है।

  73. 73

    भक्तप्रिय

    जो भक्तों को अत्यंत प्रिय हैं।

  74. 74

    शुभकर

    जो जीवन में शुभता प्रदान करते हैं।

  75. 75

    करुणामय

    जो करुणा और प्रेम से पूर्ण हैं।

  76. 76

    विश्वपालक

    जो सम्पूर्ण विश्व का पालन करते हैं।

  77. 77

    प्रेममूर्ति

    जो प्रेम और भक्ति के प्रतीक हैं।

  78. 78

    धैर्यदाता

    जो भक्तों को धैर्य और शक्ति प्रदान करते हैं।

  79. 79

    कल्याणदाता

    जो भक्तों का कल्याण करते हैं।

  80. 80

    भवबंधनहारी

    जो संसार के बंधनों से मुक्त करते हैं।

  81. 81

    महातेजस्वी

    जो महान तेज और प्रकाश से युक्त हैं।

  82. 82

    सत्यरक्षक

    जो सत्य और धर्म की रक्षा करते हैं।

  83. 83

    अमृतमय

    जो अमृत समान आनंद देने वाले हैं।

  84. 84

    नागप्रिय

    जो नागों के प्रिय देवता हैं।

  85. 85

    त्रिकालदर्शी

    जो भूत, वर्तमान और भविष्य को जानते हैं।

  86. 86

    भक्तपालक

    जो भक्तों का पालन और संरक्षण करते हैं।

  87. 87

    अचलस्वरूप

    जो स्थिर और अडिग स्वरूप वाले हैं।

  88. 88

    जगतहितकारी

    जो सम्पूर्ण संसार का हित करते हैं।

  89. 89

    विषनाशक

    जो विष और रोगों का नाश करते हैं।

  90. 90

    भक्तानंद

    जो भक्तों को आनंद और सुख प्रदान करते हैं।

  91. 91

    पवित्ररूप

    जो पवित्रता और दिव्यता के स्वरूप हैं।

  92. 92

    भक्तशरण

    जो भक्तों को अपनी शरण देते हैं।

  93. 93

    नागनाथ

    जो नागों के स्वामी और संरक्षक हैं।

  94. 94

    महाकृपालु

    जो अत्यंत कृपालु और दयालु हैं।

  95. 95

    सर्वरक्षक

    जो सभी जीवों की रक्षा करते हैं।

  96. 96

    भवमोचक

    जो संसार के दुःखों से मुक्ति देते हैं।

  97. 97

    धर्मसेवी

    जो धर्म और सेवा के प्रतीक हैं।

  98. 98

    अनंतदयालु

    जो अनंत दया और प्रेम बरसाते हैं।

  99. 99

    शुभवर्धन

    जो जीवन में शुभता और समृद्धि बढ़ाते हैं।

  100. 100

    अखिलेश्वर

    जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड के ईश्वर हैं।

  101. 101

    सर्वकल्याणकारी

    जो सभी का कल्याण करने वाले हैं।

  102. 102

    नागदेवप्रिय

    जो नागदेवों के प्रिय स्वरूप हैं।

  103. 103

    सदाशिवप्रिय

    जो भगवान शिव के प्रिय माने जाते हैं।

  104. 104

    सर्वसिद्धिदाता

    जो सभी सिद्धियां और सफलताएं प्रदान करते हैं।

  105. 105

    भक्तमित्र

    जो भक्तों के सच्चे मित्र और सहायक हैं।

  106. 106

    महामंगलकारी

    जो महान मंगल और शुभता प्रदान करते हैं।

  107. 107

    अखंडकृपालु

    जो सदैव कृपा बनाए रखते हैं।

  108. 108

    महावीर जाहरवीर कृपालु

    जो अपने भक्तों पर सदैव कृपा और संरक्षण बनाए रखते हैं।

पाठ पूर्ण

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