नर्मदा माता के मन्त्र शांत मन से जपें। यदि वेदी पर जल रखें तो उसे सम्मान दें और जल की बर्बादी न करें।
मूल मन्त्र
ॐ ह्रीं नर्मदायै नमः
माँ नर्मदा की मूल उपासना, पाप-मोचन और सर्वकार्य सिद्धि के लिए
१०८ बार
सरल मन्त्र
ॐ नर्मदायै नमः
दैनिक स्मरण, मन की शुद्धि और माँ नर्मदा के आशीर्वाद के लिए
११ या २१ बार
नर्मदा गायत्री मन्त्र
ॐ सोमोद्भवायै विद्महे | रेवायै धीमहि | तन्नो नर्मदा प्रचोदयात्
बुद्धि, पवित्रता, आत्मशुद्धि और माँ नर्मदा की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए
२१ या १०८ बार
नर्मदाष्टक मूल मन्त्र
सबिन्दु सिन्धु सुस्खल तरंग भंग रंजितम् | द्विषत्सु पाप जात जात कारि वारि संयुतम् | कृतान्त दूत काल भूत भीति हारि वर्मदे | त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवि नर्मदे
माँ नर्मदा के प्रति पूर्ण समर्पण, सर्व पाप नाश और मोक्ष प्राप्ति के लिए
७ या २१ बार (नर्मदा तट पर विशेष फलदायी)
नर्मदा रक्षा एवं शान्ति मन्त्र
ॐ श्रीं ह्रीं नर्मदा देव्यै, सर्व पाप हरय हरय, रोग नाशय नाशय, भक्तान् रक्ष रक्ष, शान्तिं देहि, मोक्षं देहि स्वाहा
रोग, पाप, संकट से मुक्ति और जीवन में शान्ति व मोक्ष की प्राप्ति के लिए
११ या १०८ बार (सोमवार या पूर्णिमा को विशेष फलदायी)
मार्गदर्शन
मन्त्र-जप से वाणी, आचरण और नदियों के प्रति सम्मान को भी निर्मल बनाएं।

