श्री नर्मदा माता की पूजा शुद्धि, शांति, आध्यात्मिक उन्नति, नकारात्मकता से रक्षा, स्वास्थ्य, समृद्धि और दिव्य कृपा प्राप्ति के लिए की जाती है। माँ नर्मदा को पवित्र नदी देवी के रूप में पूजा जाता है, जिनके दर्शन और स्मरण से पापों का नाश तथा आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है।
तैयारी
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
माँ नर्मदा का चित्र या स्वच्छ जल से भरा कलश स्वच्छ आसन पर स्थापित करें
वेदी को फूलों और स्वच्छ वस्त्र से सजाएँ
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
शांत और भक्तिमय वातावरण बनाए रखें
आवश्यक सामग्री (सामग्री)
माँ नर्मदा का चित्र या पवित्र जल पात्र
स्वच्छ जल
फूल
कुमकुम, हल्दी और चंदन
अक्षत (चावल)
अगरबत्ती
घी का दीपक
कपूर
फल
दूध या मिठाई भोग हेतु
तुलसी पत्र (वैकल्पिक)
नारियल
कलश
संकल्प
शांत मन से हाथ जोड़कर बैठें
भक्ति और पवित्रता के साथ माँ नर्मदा की पूजा करने का संकल्प लें
आध्यात्मिक शांति, शुद्धि, समृद्धि और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें
ध्यान
आँखें बंद करके माँ नर्मदा का ध्यान करें
दिव्य पवित्रता और आशीर्वाद से प्रवाहित होती पावन नदी की कल्पना करें
मन को शांति और भक्ति में एकाग्र करें
आवाहन
माँ नर्मदा को पूजा स्वीकार करने हेतु आमंत्रित करें
श्रद्धापूर्वक फूल और अक्षत अर्पित करें
'ॐ नर्मदायै नमः' मंत्र का 11 या 21 बार जप करें
आसन एवं पाद्य
फूल अर्पित करके प्रतीकात्मक आसन समर्पित करें
स्वागत और शुद्धिकरण हेतु स्वच्छ जल छिड़कें
स्नान (अभिषेक)
माँ नर्मदा को प्रतीकात्मक रूप से स्वच्छ जल अर्पित करें
यदि कलश की पूजा कर रहे हों, तो श्रद्धा से वेदी के चारों ओर जल छिड़कें
अलंकार
कुमकुम, हल्दी और चंदन अर्पित करें
फूल चढ़ाकर वेदी को सुंदर रूप से सजाएँ
दिव्य वातावरण हेतु दीप प्रज्वलित करें
पुष्पांजलि
हाथ जोड़कर पुष्प अर्पित करें
पवित्रता, आध्यात्मिक शक्ति, शांति और रक्षा की प्रार्थना करें
नैवेद्य (भोग)
फल, दूध, मिठाई या सात्त्विक भोजन अर्पित करें
नारियल चढ़ाकर आशीर्वाद की प्रार्थना करें
माँ नर्मदा से कृपापूर्वक भोग स्वीकार करने की विनती करें
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाएँ
घी का दीपक प्रज्वलित करें
यदि संभव हो तो कपूर से आरती करें
मंत्र जप
'ॐ नर्मदायै नमः' मंत्र का 11, 21 या 108 बार जप करें
संभव हो तो नर्मदा अष्टकम या नर्मदा स्तुति का पाठ करें
आध्यात्मिक शुद्धि और दिव्य कृपा हेतु सच्चे मन से प्रार्थना करें
आरती
भक्ति भाव से माँ नर्मदा की आरती करें
चित्र या कलश के सामने दीपक को गोलाकार घुमाएँ
शांत भाव से भजन और स्तुति गाएँ
प्रदक्षिणा
पूजा स्थल की 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम (अंतिम प्रार्थना)
माँ नर्मदा को प्रणाम करें
पवित्रता, समृद्धि, शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त करें
प्रसाद वितरण
मिठाई, फल और प्रसाद परिवार के सदस्यों एवं भक्तों में वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
सोमवार, पूर्णिमा, नर्मदा जयंती और विशेष नदी उत्सव माँ नर्मदा की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। भक्तजन प्रायः नदियों के तट पर दीपदान करते हैं और पवित्र स्तोत्रों का पाठ करते हैं। पूजा सदैव पवित्रता, कृतज्ञता और प्रकृति एवं पवित्र नदियों के प्रति सम्मान भाव से करनी चाहिए।

