शीतला माता की पूजा स्वास्थ्य, रोगों से रक्षा और परिवार की सुख-शांति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। सच्ची श्रद्धा और पवित्रता के साथ की गई शीतला माता की आराधना से जीवन में शांति और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
तैयारी
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ और पवित्र करें
शीतला माता की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
आवश्यक सामग्री
शीतला माता की मूर्ति या चित्र
फूल
हल्दी, कुमकुम और चंदन
अगरबत्ती
घी का दीपक
जल पात्र
नारियल
फल
मिठाई
बासी भोजन या ठंडा भोग (जैसे पूड़ी, हलवा, दही, चावल)
नीम के पत्ते
संकल्प
शांत मन से माता की पूजा करने का संकल्प लें
परिवार के स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा की प्रार्थना करें
ध्यान
नेत्र बंद करके शीतला माता का ध्यान करें
उनके शांत और करुणामयी स्वरूप का स्मरण करें
कुछ मिनट तक मन को एकाग्र रखें
आवाहन
शीतला माता को पूजा स्वीकार करने हेतु आमंत्रित करें
‘ॐ शीतलायै नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जप करें
आसन एवं पाद्य
आसन रूप में पुष्प अर्पित करें
स्वागत और शुद्धि हेतु जल अर्पित करें
स्नान
मूर्ति पर स्वच्छ जल अर्पित करें
इच्छानुसार गंगाजल से शुद्धि करें
अलंकार
हल्दी, कुमकुम और चंदन लगाएं
फूल और नीम के पत्ते अर्पित करें
नैवेद्य
ठंडा या बासी भोजन भोग रूप में अर्पित करें
फल और मिठाई चढ़ाएं
भक्ति भाव से भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाएं
घी का दीपक प्रज्वलित करें
आरती
शीतला माता की आरती गाएं
दीपक को गोलाकार घुमाकर श्रद्धा पूर्वक आरती करें
प्रदक्षिणा
मूर्ति या पूजा स्थान के चारों ओर 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम
माता को प्रणाम करके आशीर्वाद प्राप्त करें
स्वास्थ्य, शांति और सुख की प्रार्थना करें
प्रसाद वितरण
भोग और फल प्रसाद रूप में वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
शीतला माता की पूजा विशेष रूप से शीतला अष्टमी के दिन की जाती है। इस दिन ताजा भोजन बनाने के बजाय एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा में स्वच्छता, श्रद्धा और नीम के पत्तों का विशेष महत्व होता है।

