भगवान शिव की पूजा विधि एक संपूर्ण आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिसमें शुद्धि, अभिषेक, मंत्र जाप और भक्ति प्रमुख हैं। इसे प्रतिदिन या विशेष दिनों जैसे सोमवार और महाशिवरात्रि पर किया जा सकता है।
तैयारी
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
शिवलिंग या शिव जी की तस्वीर स्वच्छ आसन पर स्थापित करें
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
मन को शांत और एकाग्र रखें
सामग्री (पूजा सामग्री)
शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा
जल या गंगाजल
दूध
दही
शहद
घी
चीनी (पंचामृत हेतु)
बेल पत्र (तीन पत्तियों वाला)
धतूरा और भांग (वैकल्पिक)
सफेद पुष्प
चंदन
धूप
दीपक (तेल या घी का)
फल और मिठाई (भोग)
आरती हेतु कपूर
कलश (वैकल्पिक, आम के पत्तों सहित)
संकल्प
- 1
दाएँ हाथ में जल लें
- 2
अपना नाम, तिथि और पूजा का उद्देश्य बोलें
- 3
शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करें
गणेश वंदना
- 1
पूजा का आरंभ भगवान गणेश का स्मरण करके करें
- 2
‘ॐ गं गणपतये नमः’ कम से कम 3 बार बोलें
- 3
विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें
कलश स्थापना (वैकल्पिक)
- 1
एक कलश में जल भरें
- 2
ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें
- 3
इसे शिवलिंग के पास रखें, यह पवित्रता और जीवन का प्रतीक है
अभिषेक (मुख्य पूजा)
- 1
शिवलिंग पर पहले जल चढ़ाएँ
- 2
धीरे-धीरे दूध चढ़ाएँ
- 3
दही अर्पित करें
- 4
शहद अर्पित करें
- 5
घी अर्पित करें
- 6
चीनी अर्पित करें
- 7
अंत में पुनः स्वच्छ जल चढ़ाएँ
- 8
अभिषेक के दौरान निरंतर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें
बेल पत्र अर्पण
- 1
ताजा तीन पत्तियों वाला बेल पत्र लें
- 2
इसे उल्टा करके शिवलिंग पर चढ़ाएँ
- 3
ध्यान रखें कि पत्ते फटे न हों
- 4
अर्पित करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ बोलें
चंदन और पुष्प
- 1
शिवलिंग पर चंदन लगाएँ
- 2
भक्ति भाव से सफेद फूल चढ़ाएँ
धूप और दीप
- 1
धूप जलाएँ
- 2
दीपक प्रज्वलित करें
- 3
उसे शिवलिंग के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएँ
नैवेद्य (भोग)
- 1
फल, मिठाई या दूध अर्पित करें
- 2
भोग के चारों ओर जल छिड़कें
- 3
कृतज्ञता और श्रद्धा से अर्पण करें
मंत्र जाप
- 1
‘ॐ नमः शिवाय’ (11, 21 या 108 बार) जप करें
- 2
महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें
- 3
वैकल्पिक रूप से शिव चालीसा या रुद्राष्टकम पढ़ें
आरती
- 1
कपूर जलाएँ
- 2
गोलाकार घुमाकर आरती करें
- 3
‘ॐ जय शिव ओंकारा’ गाएँ
प्रदक्षिणा
- 1
शिवलिंग के चारों ओर 3 या 7 परिक्रमा करें
- 2
परंपरा अनुसार पूर्ण चक्कर न लगाएँ यदि ऐसा पालन करते हों
- 3
श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखें
प्रणाम और प्रसाद
- 1
भगवान शिव को प्रणाम करें
- 2
मौन प्रार्थना करें
- 3
परिवार में प्रसाद बाँटें
पूजा का श्रेष्ठ समय
सोमवार
महाशिवरात्रि
श्रावण मास
प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त)
महत्वपूर्ण नियम
भगवान शिव को तुलसी पत्र अर्पित न करें। सदैव ताजी और स्वच्छ सामग्री का उपयोग करें। तन और मन की पवित्रता रखें। विधि से अधिक भक्ति महत्वपूर्ण है।
दैनिक सरल पूजा हेतु आप जल और बेल पत्र अर्पित करें, ‘ॐ नमः शिवाय’ 11 बार जप करें और छोटी आरती करें। श्रद्धा से किया गया यह पूजन पर्याप्त है।

