शिव जी

शिव जी

समुद्र-मन्थन से हलाहल विष निकलता है। उसके फैलने से जीव संकट में पड़ जाते हैं और देवता कैलाश पर शिव की शरण लेते हैं। शिव उनकी पीड़ा देखकर विष पीने का निश्चय करते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

दिन

सोमवार

रंग

श्वेत

भोग

भांग और धतूरा

पर्व

महाशिवरात्रि

सावन सोमवार

शिव जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

समुद्र-मन्थन से हलाहल विष निकलता है। उसके फैलने से जीव संकट में पड़ जाते हैं और देवता कैलाश पर शिव की शरण लेते हैं। शिव उनकी पीड़ा देखकर विष पीने का निश्चय करते हैं।

शिव का विषपान

समुद्र-मन्थन से हलाहल विष निकलता है। उसके फैलने से जीव संकट में पड़ जाते हैं और देवता कैलाश पर शिव की शरण लेते हैं। शिव उनकी पीड़ा देखकर विष पीने का निश्चय करते हैं।
भवानी उनकी शक्ति को जानती हैं और इस निर्णय को स्वीकार करती हैं। शिव विष को अपनी हथेली में लेकर पी लेते हैं। उनका कण्ठ नीला पड़ जाता है, लेकिन संसार विष के संकट से बच जाता है।

सनातन धर्म का प्रकाश आगे बढ़ाएं

एक साझा किया हुआ पाठ किसी और घर में भक्ति की शुरुआत बन सकता है।