तुलसी माता पूजा विधि पारंपरिक वैष्णव पूजा पद्धति पर आधारित है। इसमें शुद्धिकरण, संकल्प, जल अर्पण, दीपदान, मंत्र जप, परिक्रमा और आरती शामिल हैं। यह पूजा घर में स्थापित तुलसी वृंदावन या गमले में लगी तुलसी माता के समक्ष की जा सकती है। विस्तृत विधि से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, पवित्रता और भक्ति भाव है।
तैयारी
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान और तुलसी चौरा साफ करें
तुलसी माता के पास स्वच्छ आसन बिछाएँ
पूर्व या उत्तरमुख होकर बैठें
मन को शांत और एकाग्र रखें
तुलसी के पास दीपक रखने का स्थान तैयार करें
सामग्री (पूजा सामग्री)
तुलसी माता का पौधा
शुद्ध जल या गंगाजल
कुमकुम, चंदन
अक्षत (चावल)
पुष्प या माला
घी या तेल का दीपक
धूपबत्ती
कपूर
मिठाई, फल या नैवेद्य
रोली
मौली (कलावा)
प्रसाद हेतु गुड़ या बताशे
संकल्प
- 1
दाएँ हाथ में थोड़ा जल लें
- 2
अपना नाम, तिथि और पूजा का उद्देश्य बोलें
- 3
घर में सुख, शांति, समृद्धि और भगवान विष्णु कृपा की प्रार्थना करें
- 4
जल भूमि पर छोड़ दें
गणेश वंदना
- 1
पूजा से पहले भगवान गणेश का स्मरण करें
- 2
‘ॐ गं गणपतये नमः’ 3, 11 या 21 बार जप करें
- 3
गणेश जी को पुष्प अर्पित करें
तुलसी माता ध्यान और आवाहन
- 1
हाथ जोड़कर तुलसी माता का ध्यान करें
- 2
तुलसी को देवी वृंदा और भगवान विष्णु प्रिय स्वरूप मानकर प्रणाम करें
- 3
मंत्र बोलें: ‘ॐ तुलस्यै नमः, तुलसीदेव्यै नमः’
मुख्य पूजा विधि
- 1
तुलसी माता की जड़ में जल अर्पित करें
- 2
चंदन और कुमकुम अर्पित करें
- 3
अक्षत अर्पित करें
- 4
पुष्प चढ़ाएँ
- 5
धूप दिखाएँ
- 6
दीपक जलाकर अर्पित करें
- 7
नैवेद्य अर्पित करें
- 8
मौली अर्पित करें (यदि परंपरा हो)
- 9
हाथ जोड़कर आशीर्वाद माँगें
मंत्र जप
- 1
‘ॐ तुलस्यै नमः’ 11, 21 या 108 बार जपें
- 2
‘ॐ वृन्दावन्यै नमः’ जपें
- 3
इच्छानुसार तुलसी स्तुति या तुलसी चालीसा पढ़ें
परिक्रमा
- 1
तुलसी माता की 3, 5, 7 या 11 बार परिक्रमा करें
- 2
परिक्रमा करते समय मंत्र जपें
- 3
भक्ति भाव से प्रणाम करें
आरती
- 1
कपूर या दीपक जलाएँ
- 2
तुलसी माता की आरती करें
- 3
श्रद्धा से तुलसी आरती गाएँ
समापन और प्रसाद
- 1
प्रार्थना करें कि घर में सुख-शांति बनी रहे
- 2
नैवेद्य को प्रसाद रूप में बाँटें
- 3
‘ॐ शांति शांति शांति’ कहकर पूजा पूर्ण करें
पूजा का श्रेष्ठ समय
प्रतिदिन प्रातःकाल
संध्या समय दीपदान विशेष शुभ माना जाता है
एकादशी, कार्तिक मास और तुलसी विवाह दिवस
गुरुवार और रविवार को भी विशेष पूजा की जाती है
महत्वपूर्ण नियम
तुलसी माता को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है। बिना स्नान तुलसी पत्र न तोड़ें। रविवार, संक्रांति, अमावस्या तथा संध्या के बाद तुलसी पत्र तोड़ने से बचें (स्थानीय परंपरा अनुसार)। तुलसी को प्रतिदिन जल दें परंतु अधिक जलभराव न करें। पूर्ण विधि से अधिक श्रद्धा और सात्विक भाव महत्वपूर्ण है।
सरल दैनिक पूजा के लिए तुलसी माता को जल अर्पित करें, दीपक जलाएँ, धूप दिखाएँ, ‘ॐ तुलस्यै नमः’ 11 बार जपें और परिक्रमा करें। तुलसी माता सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर घर में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।

