वायु देव आरती

वायु देव आरती

जय वायु देवता, ओम जय वायु देवता।

प्राण रक्षक देवा, जीवन के दाता॥

॥ जय वायु देवता ॥

हनुमान के पिता तुम, मारुत नंदन।

शक्ति बल और वेग में, तुम हो गुण-गण॥

॥ जय वायु देवता ॥

उत्तर-पश्चिम दिशा के, दिगपाल तुम देव।

अष्ट दिगपालों में, करते जग-सेव॥

॥ जय वायु देवता ॥

पंचतत्व में एक, वायु का महत्व।

बिना श्वास के जीव का, नहीं कोई मत्व॥

॥ जय वायु देवता ॥

वेद मंत्रों में पूजित, पवन देव महान।

प्राण-वायु रूप में, तुम जीवन का प्राण॥

॥ जय वायु देवता ॥

पाठ पूर्ण

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