श्री विंध्येश्वरी माता की पूजा सुरक्षा, साहस, समृद्धि, आध्यात्मिक शक्ति, पारिवारिक कल्याण और मनोकामना पूर्ति के लिए की जाती है। विंध्येश्वरी माता, जिन्हें विंध्यवासिनी देवी भी कहा जाता है, माँ दुर्गा के एक शक्तिशाली स्वरूप के रूप में विंध्याचल में विराजमान मानी जाती हैं।
तैयारी
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
विंध्येश्वरी माता की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें
वेदी को लाल वस्त्र और फूलों से सजाएँ
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
शांत और भक्तिमय वातावरण बनाए रखें
आवश्यक सामग्री (पूजा सामग्री)
विंध्येश्वरी माता की मूर्ति या चित्र
लाल फूल
कुमकुम और हल्दी
चंदन लेप
अक्षत (चावल)
अगरबत्ती
घी का दीपक
कपूर
नारियल
फल
मिठाई या खीर
पान के पत्ते और सुपारी (वैकल्पिक)
लाल वस्त्र
गंगाजल या स्वच्छ जल
संकल्प
शांत मन से हाथ जोड़कर बैठें
भक्ति के साथ विंध्येश्वरी माता की पूजा करने का संकल्प लें
सुरक्षा, साहस, समृद्धि और शांति की प्रार्थना करें
ध्यान
नेत्र बंद करके माँ विंध्येश्वरी का ध्यान करें
माता के सिंह पर विराजमान दिव्य स्वरूप की कल्पना करें
भक्ति और विश्वास के साथ मन को एकाग्र करें
आवाहन
विंध्येश्वरी माता को पूजा स्वीकार करने हेतु आमंत्रित करें
भक्ति भाव से पुष्प और अक्षत अर्पित करें
‘ॐ विंध्येश्वर्यै नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जप करें
आसन एवं पाद्य
आसन रूप में पुष्प अर्पित करें
शुद्धिकरण हेतु गंगाजल या स्वच्छ जल छिड़कें
स्नान
मूर्ति या चित्र पर स्वच्छ जल या गंगाजल अर्पित करें
इच्छानुसार पंचामृत अर्पण कर पुनः जल से शुद्ध करें
अलंकार
कुमकुम, हल्दी और चंदन लगाएँ
लाल फूल अर्पित करें और लाल वस्त्र से सजाएँ
श्रद्धा और भक्ति से देवी का अलंकरण करें
पुष्पांजलि
हाथ जोड़कर फूल अर्पित करें
शक्ति, सुरक्षा, सुख और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें
नैवेद्य
फल, मिठाई, खीर और नारियल अर्पित करें
माता से भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाएँ
घी का दीपक प्रज्वलित करें
कपूर से आरती करें (यदि उपलब्ध हो)
मंत्र जप
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं विंध्यवासिन्यै नमः’ मंत्र का 11, 21 या 108 बार जप करें
इच्छानुसार दुर्गा चालीसा या विंध्यवासिनी स्तोत्र का पाठ करें
आरती
भक्ति भाव से विंध्येश्वरी माता की आरती करें
दीपक को गोलाकार घुमाकर आरती करें
प्रदक्षिणा
पूजा स्थान के चारों ओर 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम (समापन प्रार्थना)
विंध्येश्वरी माता को प्रणाम करें
सुरक्षा, समृद्धि, शांति, साहस और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करें
प्रसाद वितरण
मिठाई, फल और नारियल को प्रसाद रूप में परिवार में वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
नवरात्रि, शुक्रवार, मंगलवार और अष्टमी के दिन विंध्येश्वरी माता की पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है। उत्तर प्रदेश का विंध्याचल धाम देवी के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। पूजा में भक्ति, पवित्रता और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

