अग्नि देव के मन्त्र दीपक के पास या उचित मार्गदर्शन वाले होम से पहले जपें। अग्नि-सुरक्षा का ध्यान हमेशा रखें।
आहुति मंत्र
॥ ॐ अग्नये स्वाहा ॥
हवन एवं अग्नि अर्पण के समय
अनुष्ठानिक मार्गदर्शन अनुसार
अग्नि प्रार्थना मंत्र
अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्। होतारं रत्नधातमम्॥
यज्ञ आरम्भ, पूजा प्रारंभ में अग्नि स्तुति हेतु
108 बार या गुरु-निर्देशानुसार
अग्नि गायत्री मंत्र
ॐ वैश्वानराय विद्महे। लालीलाय धीमहि। तन्नोऽग्निः प्रचोदयात्॥
ध्यान, शुद्धि एवं अग्निदेव की कृपा प्राप्ति हेतु
21 या 108 बार प्रतिदिन
अग्नि शांति मंत्र
ॐ अग्ने नय सुपथा राये अस्मान् विश्वानि देव वयुनानि विद्वान्।युयोध्यस्मज्जुहुराणमेनो भूयिष्ठां ते नमउक्तिं विधेम॥
पापमुक्ति, सन्मार्ग-प्राप्ति एवं आशीर्वाद हेतु
11 या 21 बार प्रतिदिन
अग्नि स्तुति मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यम्।अग्निं दूतं वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम्॥
संध्यावंदन, अग्निहोत्र एवं देव-आह्वान में
7 या 21 बार प्रतिदिन
मार्गदर्शन
दैनिक गृह-भक्ति के लिए दीपक पर्याप्त है। सुरक्षित स्थान, वायु-प्रवाह और उचित सामग्री के बिना अग्नि-विधि न करें।

