ऋग्वेद का पहला सूक्त अग्नि को समर्पित है। इसके नौ मन्त्रों में अग्नि को यज्ञ का पुरोहित और होता कहकर प्रणाम किया गया है।
अग्नि देव
ऋग्वेद का पहला सूक्त अग्नि को समर्पित है। इसके नौ मन्त्रों में अग्नि को यज्ञ का पुरोहित और होता कहकर प्रणाम किया गया है।
अग्नि से देवताओं को यज्ञ में लाने, उपासक का कल्याण करने और ऋत की रक्षा करने की प्रार्थना की जाती है। उनसे पिता की तरह सुलभ और हितकारी होने की कामना भी की गई है।

