ब्रह्मा जी की उपासना प्रायः शांत और चिंतनशील होती है। मंत्रजप विनम्रता और सीखने की वृत्ति के साथ करें।
सरल ब्रह्मा मंत्र
ॐ ब्रह्मणे नमः
ब्रह्मा जी को सृष्टिकर्ता और दिव्य व्यवस्था के अधिष्ठाता के रूप में स्मरण करने के लिए
108 बार
ब्रह्मा गायत्री मंत्र
ॐ चतुर्मुखाय विद्महे। कमण्डलुधराय धीमहि। तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्॥
ज्ञान, विद्या एवं सृजन शक्ति की प्राप्ति हेतु
21 या 108 बार प्रतिदिन
ब्रह्मा स्तुति मंत्र
नमो ब्रह्मण्यदेवाय गो-ब्राह्मण-हिताय च। जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः॥
सृष्टि के कल्याण एवं ब्रह्मांडीय व्यवस्था की स्थापना हेतु
11 या 21 बार
ब्रह्मा ध्यान मंत्र
ॐ वेदात्मनाय विद्महे। हिरण्यगर्भाय धीमहि। तन्नो ब्रह्मः प्रचोदयात्॥
ध्यान साधना, आत्मज्ञान एवं वेद विद्या प्राप्ति हेतु
108 बार प्रातःकाल
ब्रह्मा आशीर्वाद मंत्र
ॐ ह्रीं ब्रह्मणे नमः। सृष्टिकर्त्रे स्वाहा। विधात्रे विद्महे नमः॥
नवीन कार्य आरम्भ, विद्यारम्भ एवं सृजनात्मक शक्ति जागृति हेतु
7 या 21 बार
मार्गदर्शन
ब्रह्मा साधना का वास्तविक सौंदर्य तब प्रकट होता है जब ज्ञान सत्यपूर्ण हो, वाणी शुद्ध हो और सृजन अहंकाररहित हो।

