ब्रह्मा जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व

ब्रह्मा जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व

प्रलय के जल में शेष पर विश्राम करते विष्णु की नाभि से कमल प्रकट होता है। उसी कमल पर ब्रह्मा प्रकट होते हैं। चारों दिशाओं में देखने पर उनके चार मुख होते हैं।

कमल से ब्रह्मा का प्राकट्य

प्रलय के जल में शेष पर विश्राम करते विष्णु की नाभि से कमल प्रकट होता है। उसी कमल पर ब्रह्मा प्रकट होते हैं। चारों दिशाओं में देखने पर उनके चार मुख होते हैं।
ब्रह्मा कमल की उत्पत्ति जानना चाहते हैं। वे उसकी नाल में उतरकर खोजते हैं, पर उसके मूल तक नहीं पहुँच पाते। लौटकर वे ध्यान में बैठते हैं। अन्ततः उन्हें अपने हृदय में भगवान के दर्शन होते हैं और वे सृष्टि के कार्य की ओर प्रवृत्त होते हैं।

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