ब्रह्मा जी

ब्रह्मा जी

प्रलय के जल में शेष पर विश्राम करते विष्णु की नाभि से कमल प्रकट होता है। उसी कमल पर ब्रह्मा प्रकट होते हैं। चारों दिशाओं में देखने पर उनके चार मुख होते हैं।

सरल ब्रह्मा मंत्र

ॐ ब्रह्मणे नमः

दिन

गुरुवार

रंग

पीला

भोग

पंचामृत

ब्रह्मा जी की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

प्रलय के जल में शेष पर विश्राम करते विष्णु की नाभि से कमल प्रकट होता है। उसी कमल पर ब्रह्मा प्रकट होते हैं। चारों दिशाओं में देखने पर उनके चार मुख होते हैं।

कमल से ब्रह्मा का प्राकट्य

प्रलय के जल में शेष पर विश्राम करते विष्णु की नाभि से कमल प्रकट होता है। उसी कमल पर ब्रह्मा प्रकट होते हैं। चारों दिशाओं में देखने पर उनके चार मुख होते हैं।
ब्रह्मा कमल की उत्पत्ति जानना चाहते हैं। वे उसकी नाल में उतरकर खोजते हैं, पर उसके मूल तक नहीं पहुँच पाते। लौटकर वे ध्यान में बैठते हैं। अन्ततः उन्हें अपने हृदय में भगवान के दर्शन होते हैं और वे सृष्टि के कार्य की ओर प्रवृत्त होते हैं।

सनातन धर्म का प्रकाश आगे बढ़ाएं

एक साझा किया हुआ पाठ किसी और घर में भक्ति की शुरुआत बन सकता है।