दुर्गा माता पूजा विधि पारंपरिक षोडशोपचार (16 चरणों) की पूजा पद्धति पर आधारित है। इसमें शुद्धिकरण, आवाहन, अर्पण और आरती शामिल हैं। यह पूजा घर पर माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र के साथ की जा सकती है। विस्तृत विधि से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और मन की पवित्रता है।
तैयारी
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
चौकी पर स्वच्छ लाल या पीला वस्त्र बिछाएँ
माता दुर्गा की मूर्ति या चित्र पूर्व या उत्तर दिशा की ओर स्थापित करें
स्वच्छ आसन पर पूर्व या उत्तरमुख होकर बैठें
मन को शांत और एकाग्र रखें
सामग्री (पूजा सामग्री)
माता दुर्गा की मूर्ति या चित्र
जल (संभव हो तो गंगाजल)
लाल पुष्प (गुड़हल, गुलाब आदि)
बेलपत्र (वैकल्पिक)
कुमकुम, चंदन
धूपबत्ती
घी का दीपक
आरती हेतु कपूर
फल, मिठाई या नैवेद्य
चावल (अक्षत)
पान और सुपारी (तांबूल)
जल से भरा कलश और आम के पत्ते (वैकल्पिक)
चढ़ाने हेतु लाल वस्त्र या चुनरी
संकल्प
- 1
दाएँ हाथ में थोड़ा जल लें
- 2
अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो), तिथि और पूजा का उद्देश्य बोलें
- 3
आशीर्वाद, रक्षा, शांति और विघ्न नाश की प्रार्थना करें
- 4
‘तथास्तु’ कहकर जल भूमि पर छोड़ दें
गणेश वंदना
- 1
विघ्नों के नाश हेतु पहले भगवान गणेश का स्मरण करें
- 2
‘ॐ गं गणपतये नमः’ 3, 11 या 21 बार जप करें
- 3
गणेश जी को पुष्प अर्पित करें
कलश स्थापना (वैकल्पिक)
- 1
कलश में जल भरें और ऊपर आम के पत्ते रखें
- 2
उस पर लाल वस्त्र में लिपटा नारियल रखें
- 3
कलश को माता की उपस्थिति के प्रतीक रूप में मूर्ति के पास रखें
ध्यान और आवाहन
- 1
आँखें बंद करके माता दुर्गा के स्वरूप का ध्यान करें
- 2
हाथ जोड़कर माँ दुर्गा का आवाहन करें
- 3
मंत्र बोलें: ‘ॐ भूर्भुवः स्वः दुर्गादेव्यै नमः दुर्गादेवीं आवाहयामि’
षोडशोपचार पूजा (मुख्य 16 अर्पण)
- 1
आसन अर्पित करें
- 2
पाद्य (चरण धोने हेतु जल) अर्पित करें
- 3
अर्घ्य अर्पित करें
- 4
आचमन जल अर्पित करें
- 5
स्नान कराएँ (जल या दूध से)
- 6
वस्त्र अर्पित करें (या लाल पुष्प)
- 7
चंदन लगाएँ
- 8
पुष्प अर्पित करें
- 9
धूप दिखाएँ
- 10
दीप दिखाएँ
- 11
नैवेद्य अर्पित करें
- 12
तांबूल अर्पित करें
- 13
दक्षिणा (सिक्का या फल) अर्पित करें
- 14
दीप और कपूर से आरती करें
- 15
दोनों हाथों से पुष्पांजलि अर्पित करें
- 16
मौन भाव से आशीर्वाद माँगें
मंत्र जप
- 1
दुर्गा बीज मंत्र जपें: ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’
- 2
‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ 11, 21 या 108 बार जपें
- 3
इच्छानुसार दुर्गा चालीसा या दुर्गा के 108 नाम पढ़ें
आरती
- 1
कपूर या घी का दीपक जलाएँ
- 2
घुमाकर आरती करें
- 3
‘जय अम्बे गौरी’ या कोई भी दुर्गा आरती श्रद्धा से गाएँ
प्रदक्षिणा और प्रणाम
- 1
वेदी के चारों ओर 3 या 7 प्रदक्षिणा करें
- 2
माता दुर्गा को साष्टांग प्रणाम करें
- 3
हृदय से रक्षा, साहस और शांति की प्रार्थना करें
समापन और प्रसाद
- 1
नैवेद्य को परिवार में प्रसाद रूप में बाँटें
- 2
फल और मिठाई वितरित करें
- 3
‘ॐ शांति शांति शांति’ कहकर पूजा समाप्त करें
पूजा का श्रेष्ठ समय
नवरात्रि के दौरान (विशेषकर षष्ठी से दशमी तक)
प्रतिदिन सुबह या संध्या समय
अष्टमी और नवमी अत्यंत शुभ मानी जाती हैं
कोई भी शुभ मुहूर्त या शुक्रवार
महत्वपूर्ण नियम
ताज़ी और स्वच्छ सामग्री का उपयोग करें। लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है। शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखें। महिलाएँ भी यह पूजा कर सकती हैं। पूर्ण विधि से अधिक भक्ति महत्वपूर्ण है। दैनिक संक्षिप्त पूजा में दीप, धूप, पुष्प अर्पित कर श्रद्धा से मंत्र जप करें।
सरल दैनिक पूजा के लिए दीपक और धूप जलाएँ, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें, ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ 11 बार जपें और छोटी आरती करें। माँ दुर्गा सच्ची भक्ति स्वीकार करती हैं।

