दुर्गा माता

दुर्गा माता

देवीमाहात्म्य के तीसरे अध्याय में देवी और महिषासुर के युद्ध का वर्णन है। महिषासुर भैंसे, सिंह, पुरुष और हाथी के रूप बदलकर युद्ध करता है। देवी उसके प्रत्येक रूप का सामना करती हैं।

बीज मंत्र (कृपा प्राप्ति)

ॐ दुं दुर्गायै नमः

दिन

शुक्रवार

रंग

लाल

भोग

हलवा

पर्व

नवरात्रि

दुर्गा पूजा

दुर्गा माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

देवीमाहात्म्य के तीसरे अध्याय में देवी और महिषासुर के युद्ध का वर्णन है। महिषासुर भैंसे, सिंह, पुरुष और हाथी के रूप बदलकर युद्ध करता है। देवी उसके प्रत्येक रूप का सामना करती हैं।

महिषासुरमर्दिनी

महिषासुर भैंसे, सिंह, पुरुष और हाथी के रूप बदलकर देवी से युद्ध करता है। देवी उसके प्रत्येक रूप का सामना करती हैं।
अन्त में देवी उसके कण्ठ को पैर से दबाकर त्रिशूल से प्रहार करती हैं। जब वह अपने मुख से आधा बाहर निकलता है, तब देवी तलवार से उसका सिर काट देती हैं। इसी विजय के कारण वे महिषासुरमर्दिनी कहलाती हैं।

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