गंगा माता पूजा विधि पारंपरिक वैदिक एवं भक्तिमय पूजा पद्धति पर आधारित है। इसमें शुद्धिकरण, संकल्प, आवाहन, जल अर्पण, पुष्प, दीप, मंत्र जप और आरती शामिल हैं। यह पूजा घर में गंगा माता की मूर्ति, चित्र या गंगाजल कलश के समक्ष की जा सकती है। विस्तृत विधि से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, शुद्ध भाव और पवित्र मन है।
तैयारी
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
चौकी पर स्वच्छ सफेद या पीला वस्त्र बिछाएँ
गंगा माता का चित्र, मूर्ति या गंगाजल कलश स्थापित करें
पूर्व या उत्तरमुख होकर आसन ग्रहण करें
मन को शांत और पवित्र रखें
सामग्री (पूजा सामग्री)
गंगा माता का चित्र या मूर्ति
गंगाजल या स्वच्छ जल
कलश
सफेद या पीले पुष्प
अक्षत (चावल)
कुमकुम, चंदन
धूपबत्ती
घी का दीपक
कपूर
फल, मिठाई या नैवेद्य
तुलसी पत्ते (वैकल्पिक)
पान, सुपारी
सफेद वस्त्र या चुनरी (वैकल्पिक)
संकल्प
- 1
दाएँ हाथ में थोड़ा जल लें
- 2
अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो), तिथि और पूजा का उद्देश्य बोलें
- 3
पाप नाश, शुद्धि, शांति और परिवार कल्याण की प्रार्थना करें
- 4
जल भूमि या पात्र में छोड़ दें
गणेश वंदना
- 1
पूजा से पहले भगवान गणेश का स्मरण करें
- 2
‘ॐ गं गणपतये नमः’ 3, 11 या 21 बार जप करें
- 3
गणेश जी को पुष्प अर्पित करें
कलश स्थापना (वैकल्पिक)
- 1
कलश में गंगाजल या स्वच्छ जल भरें
- 2
ऊपर आम के पत्ते रखें
- 3
उस पर नारियल स्थापित करें
- 4
कलश को गंगा माता की उपस्थिति का प्रतीक मानें
ध्यान और आवाहन
- 1
आँखें बंद करके गंगा माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें
- 2
हाथ जोड़कर माता गंगा का आवाहन करें
- 3
मंत्र बोलें: ‘ॐ श्री गंगायै नमः, गंगा मातः आवाहयामि’
मुख्य पूजा विधि
- 1
आसन अर्पित करें
- 2
पाद्य रूप में जल अर्पित करें
- 3
अर्घ्य अर्पित करें
- 4
चंदन लगाएँ
- 5
अक्षत अर्पित करें
- 6
पुष्प चढ़ाएँ
- 7
धूप दिखाएँ
- 8
दीप दिखाएँ
- 9
नैवेद्य अर्पित करें
- 10
तांबूल अर्पित करें
- 11
दक्षिणा (सिक्का या फल) अर्पित करें
- 12
दोनों हाथ जोड़कर कृपा माँगें
मंत्र जप
- 1
‘ॐ गंगायै नमः’ 11, 21 या 108 बार जपें
- 2
‘ॐ श्री भागीरथ्यै नमः’ जपें
- 3
इच्छानुसार गंगा स्तोत्र, गंगा चालीसा या 108 नाम पढ़ें
आरती
- 1
कपूर या घी का दीपक जलाएँ
- 2
गंगा माता की आरती करें
- 3
श्रद्धा से गंगा आरती गाएँ
प्रदक्षिणा और प्रणाम
- 1
वेदी या कलश के चारों ओर 3 या 7 प्रदक्षिणा करें
- 2
गंगा माता को प्रणाम करें
- 3
हृदय से शुद्धि, आरोग्य और शांति की प्रार्थना करें
समापन और प्रसाद
- 1
नैवेद्य को प्रसाद रूप में बाँटें
- 2
परिवार को गंगाजल आचमन रूप में दें (परंपरा अनुसार)
- 3
‘ॐ शांति शांति शांति’ कहकर पूजा समाप्त करें
पूजा का श्रेष्ठ समय
प्रातःकाल सूर्योदय के समय
संध्या समय दीपदान के साथ
गंगा दशहरा
कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति, अमावस्या और पूर्णिमा
सोमवार या किसी भी शुभ तिथि
महत्वपूर्ण नियम
पूजा में स्वच्छ जल और ताज़ी सामग्री का उपयोग करें। गंगाजल को अत्यंत पवित्र माना जाता है, इसलिए आदरपूर्वक रखें। शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखें। पूर्ण विधि से अधिक भक्ति महत्वपूर्ण है। यदि नदी तट पर पूजा करें तो स्वच्छता रखें और जल प्रदूषण न करें।
सरल दैनिक पूजा के लिए दीपक जलाएँ, गंगा माता को पुष्प अर्पित करें, गंगाजल का स्मरण करें, ‘ॐ गंगायै नमः’ 11 बार जपें और छोटी आरती करें। गंगा माता सच्ची भक्ति स्वीकार कर शुद्धि, पुण्य और शांति प्रदान करती हैं।

