गंगा माता

गंगा माता

अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाने का संकल्प लेते हैं। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा आने को तैयार होती हैं, लेकिन उनकी प्रबल धारा को सँभालने वाला भी चाहिए।

मूल मंत्र

ॐ ह्रीं गंगायै विश्वरूपिणी नारायण्यै नमो नमः।

दिन

सोमवार

रंग

श्वेत

भोग

फल

गंगा माता की कथा और आध्यात्मिक महत्व

अर्थ, उपासना और उपलब्ध पाठ को समझने के लिए संक्षिप्त परिचय।

अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाने का संकल्प लेते हैं। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा आने को तैयार होती हैं, लेकिन उनकी प्रबल धारा को सँभालने वाला भी चाहिए।

भगीरथ और गंगा का अवतरण

अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए भगीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाने का संकल्प लेते हैं। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा आने को तैयार होती हैं, लेकिन उनकी प्रबल धारा को सँभालने वाला भी चाहिए।
भगीरथ शिव की आराधना करते हैं। शिव गंगा के वेग को अपने मस्तक पर धारण करना स्वीकार करते हैं। इसके बाद गंगा भगीरथ के पीछे बहती हुई सगर-पुत्रों की भस्म तक पहुँचती हैं। उनके जल के स्पर्श से उन पूर्वजों का उद्धार होता है।

सनातन धर्म का प्रकाश आगे बढ़ाएं

एक साझा किया हुआ पाठ किसी और घर में भक्ति की शुरुआत बन सकता है।