गंगा मन्त्र प्रायः स्वच्छ जल के सामने, स्नान से पहले या प्रातःकालीन पूजा में जपे जाते हैं। घर में कलश या छोटे पात्र में गंगा माता का आवाहन करते समय भी इन मन्त्रों का प्रयोग किया जाता है।
मूल मंत्र
ॐ ह्रीं गंगायै विश्वरूपिणी नारायण्यै नमो नमः।
माता गंगा की कृपा, पवित्रता, पापों के क्षय और जीवन में शांति के लिए।
११, २१ या १०८ बार
सरल गंगा मन्त्र
ॐ ह्रीं श्रीं गंगायै स्वाहा।
दैनिक स्मरण, स्नान के समय जप और घर में शुभता व शुद्धता के लिए।
११ या २१ बार
स्नान मंत्र (गंगा जल का प्रयोग करते समय)
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
स्नान, पूजा या गंगा जल का छिड़काव करते समय सभी पवित्र नदियों का आवाहन करने हेतु।
१, ३ या ११ बार
गंगा गायत्री मंत्र
ॐ भागीरथाय विद्महे सुरसरिये धीमहि तन्नो गंगा प्रचोदयात्।
आध्यात्मिक शुद्धि, ज्ञान, मोक्ष भावना और माता गंगा के आशीर्वाद हेतु।
११, २१ या १०८ बार
मार्गदर्शन
यदि घर में गंगाजल हो तो उसे आदरपूर्वक रखकर जप करें। यदि न हो, तो स्वच्छ जल में मानसिक रूप से गंगा माता का आवाहन करके पूजा करें।

