गायत्री जप तीनों संध्याओं — प्रातः, मध्याह्न और सायं — में विशेष प्रिय माना जाता है। जप शुद्धता, एकाग्रता और श्रद्धा के साथ करें।
सरल गायत्री मंत्र
ॐ श्री गायत्र्यै नमः
गायत्री माता के दैनिक स्मरण और पूजन के लिए
२१ या १०८ बार
महागायत्री मूल मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
बुद्धि, विवेक, आत्मज्ञान और सर्वपापनाश के लिए — प्रातःकाल सूर्योदय के समय जप करें
१०८ बार
गायत्री गायत्री मंत्र
ॐ वेदमात्रे विद्महे, ब्रह्मप्रियायै धीमहि, तन्नो गायत्री प्रचोदयात्
विद्या, मेधाशक्ति, एकाग्रता और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति के लिए
१०८ बार
गायत्री शक्ति मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागायत्र्यै नमः स्वाहा
समस्त मनोकामना पूर्ति, नकारात्मक शक्तियों के नाश और दैवीय कृपा प्राप्ति के लिए
५४ या १०८ बार
गायत्री स्तुति मंत्र
ॐ आयातु वरदे देवि, त्र्यक्षरे ब्रह्मवादिनि। गायत्री छन्दसां माता, इदं ब्रह्म जुषस्व मे॥
गायत्री माता की विशेष उपासना, यज्ञ, हवन और सन्ध्यावन्दन के समय पाठ के लिए
२१ बार
मार्गदर्शन
गायत्री साधना तब फलवती होती है जब वह शुद्ध जीवन, नियमित अध्ययन, सत्यनिष्ठा और संध्या-कालीन अनुशासन के साथ जुड़ी हो।

