श्री गायत्री माता की पूजा बुद्धि, ज्ञान, मानसिक स्पष्टता, आध्यात्मिक जागरण, सुरक्षा तथा शिक्षा और जीवन में सफलता के लिए की जाती है। गायत्री माता को वेदों की जननी और दिव्य ज्ञान एवं प्रकाश की स्वरूप माना जाता है।
तैयारी
प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
श्री गायत्री माता की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें
शांत और पवित्र वातावरण बनाए रखें
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय पूजा करें
आवश्यक सामग्री
गायत्री माता की मूर्ति या चित्र
लाल या पीले फूल
चंदन का लेप
कुमकुम और हल्दी
अक्षत (चावल)
अगरबत्ती
घी का दीपक
कपूर
स्वच्छ जल या कलश
फल और मिठाई
दूध या पंचामृत
पीला वस्त्र
मंत्र जाप के लिए माला
संकल्प
शांत मन से हाथ जोड़कर बैठें
भक्ति और पवित्रता के साथ गायत्री माता की पूजा करने का संकल्प लें
बुद्धि, ज्ञान, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करें
ध्यान
नेत्र बंद करके गायत्री माता का ध्यान करें
कमल पर विराजमान उनके तेजस्वी दिव्य स्वरूप का स्मरण करें
दिव्य ज्ञान और सार्वभौमिक ऊर्जा पर मन केंद्रित करें
आवाहन
गायत्री माता को पूजा स्थल पर पधारने हेतु आमंत्रित करें
भक्ति भाव से फूल अर्पित करें
‘ॐ भूर्भुवः स्वः’ या ‘ॐ गायत्र्यै नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें
आसन एवं पाद्य
आसन रूप में पुष्प अर्पित करें
शुद्धि और स्वागत हेतु जल छिड़कें
स्नान
मूर्ति या चित्र पर स्वच्छ जल छिड़कें
यदि उपलब्ध हो तो दूध या पंचामृत अर्पित करें
स्वच्छ कपड़े से धीरे से साफ करें
अलंकार
चंदन, कुमकुम और हल्दी अर्पित करें
पीले या लाल फूल चढ़ाएं
यदि संभव हो तो पीले वस्त्र से सजाएं
पुष्पांजलि
हाथ जोड़कर पुष्प अर्पित करें
बुद्धि, ज्ञान, विवेक और सफलता की प्रार्थना करें
नैवेद्य
फल, मिठाई, दूध और सात्विक भोजन अर्पित करें
आशीर्वाद सहित भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाएं
घी का दीपक प्रज्वलित करें
यदि उपलब्ध हो तो कपूर आरती करें
मंत्र जाप
गायत्री मंत्र ‘ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्’ का 108 बार जाप करें
संभव हो तो गायत्री चालीसा या स्तोत्र का पाठ करें
आरती
भक्ति भाव से गायत्री माता की आरती करें
दीपक को गोलाकार घुमाकर आरती करें
प्रदक्षिणा
पूजा स्थान की 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम
गायत्री माता को प्रणाम करें
बुद्धि, विवेक, आध्यात्मिक जागरण और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करें
प्रसाद वितरण
फल और मिठाई का प्रसाद वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
गायत्री पूजा सूर्योदय या ब्रह्म मुहूर्त में करने से विशेष फल प्राप्त होता है। स्वच्छता, एकाग्रता और मंत्रों का शुद्ध उच्चारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जाप करने से बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति में वृद्धि होती है।

