जगन्नाथ जी आरती

जगन्नाथ जी आरती

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी, परसत चरणारविंद आपदा हारी।

निरखत मुखारविंद आपदा हारी, कंचन थार धूप दीप ज्योति जगमगी।

अग्निकुंड घिरत पाव-पाव साथरी।

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी

देवन द्वारे ठाढ़े रोहिणी खड़ी, मार्कण्डेय श्वेत गंगा आन के भरी।

गरुड़ खंभ सिंह पौर यात्रा जुड़ी, यात्रा की भीड़ बहुत बेंत की छड़ी।

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी

धन्य धन्य सुरश्याम आज की घड़ी।

आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी

सनातन धर्म का प्रकाश आगे बढ़ाएं

एक साझा किया हुआ पाठ किसी और घर में भक्ति की शुरुआत बन सकता है।