जगन्नाथ जी चालीसा

जगन्नाथ जी चालीसा

॥ दोहा ॥

जय जगन्नाथ स्वामी,जय बलभद्र सुजान।

जय सुभद्रा माता,पूरन करहु सब काम॥

॥ चालीसा ॥

जय जगन्नाथ दयालु दया के धाम।करुणा रस सागर हरहु सब अज्ञान॥

शंख चक्र धारण कर शोभित सुंदर रूप।कमल नयन मनमोहन दिव्य अनूप॥

स्वर्णमय मुकुट शोभे चंद्र समान ललाट।नख से शिख तक छवि अनुपम विराट॥

अरुण प्रभा मुकुट से शोभित तव स्वरूप।वनमाला सुशोभित अद्भुत दिव्य रूप॥

शंख बजे मृदंग बजे गूंजे मंगल गान।गदा पद्म धारण किए जग के भगवान॥

रक्ताम्बर भूषण धरे शोभा अपरम्पार।नील वर्ण तनु राजे सुखदाता अपार॥

जो भी शरण तुम्हारी आए दौड़त हो सहाय।सकल मनोरथ पूर्ण करहु हरहु दुःखदाय॥

देव दनुज नर सब करें चरणन में प्रणाम।वेद पुराण बखानते जगन्नाथ का नाम॥

श्री जगन्नाथ चालीसा जो कोई गावे।संकट कष्ट मिटे सुख संपत्ति पावे॥

जो यह पाठ करे मन लगाकर।कृपा करहु जगदीश उसे अपनाकर॥

॥ दोहा ॥

जगन्नाथ प्रभु दीन हितकारी।

कृपा दृष्टि करहु सुखकारी॥

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