मां शाकंभरी की पूजा पोषण, समृद्धि, स्वास्थ्य, अकाल से रक्षा और प्रकृति के आशीर्वाद के लिए की जाती है। मां शाकंभरी को देवी दुर्गा का करुणामयी स्वरूप माना जाता है, जो समस्त जीवों का पालन फल, सब्जियों, औषधियों और अन्न से करती हैं।
तैयारी
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें
मां शाकंभरी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें
संभव हो तो पूजा स्थान को फूलों और हरी पत्तियों से सजाएं
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
पूजा के दौरान शुद्धता, शांति और भक्ति बनाए रखें
आवश्यक सामग्री
मां शाकंभरी की मूर्ति या चित्र
ताजी सब्जियां और फल
हरी पत्तियां और फूल
कुमकुम, हल्दी और चंदन
अक्षत (चावल)
दीपक
अगरबत्ती
कपूर
दूध, मिठाई या खीर
नारियल
पान और सुपारी (वैकल्पिक)
कलश में स्वच्छ जल
लाल या हरा वस्त्र
मंत्र जाप के लिए माला
संकल्प
शांत मन से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें
श्रद्धा और भक्ति के साथ मां शाकंभरी की पूजा करने का संकल्प लें
अन्न की वृद्धि, परिवार के कल्याण, स्वास्थ्य, समृद्धि और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करें
ध्यान
नेत्र बंद करके मां शाकंभरी का ध्यान करें
माता के दिव्य स्वरूप का ध्यान करें, जिनके हाथों में फल, सब्जियां, फूल और आशीर्वाद हैं
कुछ मिनट तक शांत होकर मन को एकाग्र करें
आवाहन
मां शाकंभरी को पूजा स्वीकार करने हेतु आमंत्रित करें
भक्ति भाव से पुष्प अर्पित करें
‘ॐ श्रीं ह्रीं शाकंभऱ्यै नमः’ मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें
आसन एवं पाद्य
माता को आसन रूप में पुष्प अर्पित करें
शुद्धि और स्वागत हेतु जल छिड़कें
स्नान
मूर्ति या चित्र पर स्वच्छ जल छिड़कें
इच्छानुसार पंचामृत या दूध अर्पित करें
स्वच्छ कपड़े से धीरे से साफ करें
अलंकार
हल्दी, कुमकुम और चंदन अर्पित करें
फूल, हरी पत्तियां और माला चढ़ाएं
यदि संभव हो तो माता को लाल या हरा वस्त्र अर्पित करें
सब्जी एवं फल अर्पण
मां शाकंभरी को ताजी सब्जियां, फल, औषधियां और अनाज अर्पित करें
मौसमी उपज कृतज्ञता भाव से अर्पित करें
सभी जीवों के पोषण और समृद्धि की प्रार्थना करें
पुष्पांजलि
हाथ जोड़कर पुष्प अर्पित करें
शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख की प्रार्थना करें
नैवेद्य
खीर, मिठाई, फल, दूध या सात्विक भोजन अर्पित करें
माता से भोग स्वीकार करने की प्रार्थना करें
धूप एवं दीप
अगरबत्ती जलाएं
घी या तेल का दीपक प्रज्वलित करें
यदि उपलब्ध हो तो कपूर अर्पित करें
मंत्र जाप
‘ॐ श्रीं ह्रीं शाकंभऱ्यै नमः’ मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें
संभव हो तो दुर्गा सप्तशती, शाकंभरी स्तोत्र या देवी आरती का पाठ करें
आरती
भक्ति भाव से मां शाकंभरी की आरती करें
दीपक को गोलाकार घुमाकर आरती करें
प्रदक्षिणा
मूर्ति या पूजा स्थान की 1 या 3 बार परिक्रमा करें
प्रणाम
मां शाकंभरी को प्रणाम करें
स्वास्थ्य, समृद्धि, अन्न की वृद्धि, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त करें
प्रसाद वितरण
फल, मिठाई और अर्पित सब्जियों को प्रसाद रूप में बांटें
संभव हो तो भोजन को परिवार और जरूरतमंद लोगों में वितरित करें
महत्वपूर्ण निर्देश
नवरात्रि, शुक्रवार, पौष माह की शाकंभरी नवरात्रि और अष्टमी मां शाकंभरी की पूजा के लिए विशेष शुभ मानी जाती हैं। सब्जियां, अनाज और अन्न अर्पित करना प्रकृति और दिव्य पोषण के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। पूजा में भक्ति, शुद्धता और करुणा का विशेष महत्व माना जाता है।

